यूपी में सरकारी अनुदान का हिसाब न देने वाले विभागों पर गिरी गाज, योगी सरकार हुई सख्त

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Published By Anjali Singh
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-उपयोगिता प्रमाण-पत्र और डीसी बिल समय से जमा न करने पर तय होगी जिम्मेदारी यूसी और डीसी बिल समय से जमा न करने पर तय होगी जिम्मेदारी, 11 से 28 मई तक चलेगा विशेष अभियान

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश सरकार ने अनावर्ती सहायता अनुदानों के खर्च का समय पर हिसाब न देने वाले विभागों और अधिकारियों पर सख्ती शुरू कर दी है। दीपक कुमार द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) और एसी बिलों के सापेक्ष डीसी बिल तत्काल जमा कराए जाएं, अन्यथा संबंधित नियंत्रक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

शासनादेश के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही तक बड़ी संख्या में अनुदानों का समायोजन यूसी के अभाव में लंबित है, जिस पर प्रधान महालेखाकार कार्यालय ने आपत्ति जताई है। इसे देखते हुए 11 मई से 28 मई 2026 तक विभागीय प्राप्तियों और भुगतानों के लेखा मिलान का विशेष अभियान चलाया जाएगा।

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय पर लेखा मिलान न कराने पर पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी और महालेखाकार के आंकड़े अंतिम माने जाएंगे। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी आवश्यक दस्तावेज—रिकंसिलिएशन शीट, मासिक व्यय विवरण और अन्य रिपोर्ट—समय से उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही वर्ष 2001-02 से 2024-25 तक लंबित यूसी का निस्तारण प्राथमिकता पर करने को कहा गया है, ताकि वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

क्या होता है उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी)

यूसी वह आधिकारिक दस्तावेज है, जिससे यह प्रमाणित होता है कि सरकारी अनुदान निर्धारित उद्देश्य पर ही खर्च किया गया है। इसके अभाव में अगली वित्तीय स्वीकृतियों पर असर पड़ सकता है।

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