विजय मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार : तमिलनाडु में करीब 60 साल बाद सरकार में कांग्रेस की वापसी, दो विधायक बने मंत्री

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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चेन्नई। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने बृहस्पतिवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए दो कांग्रेस विधायक सहित 23 सदस्यों को और इसमें शामिल किया। इसके साथ ही तमिलनाडु में करीब 60 साल बाद कांग्रेस की सरकार में वापसी हुई है। शपथ ग्रहण समारोह लोक भवन में आयोजित किया गया, जहां राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

टीवीके के विधायक श्रीनाथ, एस. कमाली, सी. विजयलक्ष्मी और आर.वी. रंजितकुमार ने सबसे पहले मंत्री पद की शपथ ली। किल्लियूर से कांग्रेस के विधायक एस. राजेश कुमार और मेलूर से निर्वाचित पी. विश्वनाथन ने भी मंत्री पद की शपथ ली। तमिलनाडु के लिए कांग्रेस के प्रभारी गिरीश चोडणकर ने कहा कि पार्टी विधायकों का मंत्रिमंडल में शामिल होना राज्य के राजनीतिक इतिहास में "एक अहम घटनाक्रम" है।

उन्होंने एक न्यूज एजेंसी से कहा, "कांग्रेस कार्यकर्ता पिछले 59 वर्षों से सत्ता में हिस्सेदारी के लिए संघर्ष कर रहे थे और पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ काम कर रहे थे। अब उन्हें इसका अवसर मिला है।" करूर से कांग्रेस सांसद जोतिमणि ने एक बयान में कहा, "59 साल बाद कांग्रेस पार्टी के दो सदस्यों ने तमिलनाडु मंत्रिमंडल में जगह बनाई है। यह कांग्रेस के लिए हर्ष का क्षण है। बड़े भाई विश्वनाथन और छोटे भाई राजेश कुमार को हार्दिक बधाई। उम्मीद है कि यह जिम्मेदारी तमिलनाडु की जनता की उत्कृष्ट सेवा का बड़ा अवसर बनेगी।"

कांग्रेस समर्थकों ने सोशल मीडिया पर भी इसका स्वागत किया कि पार्टी विधायकों को 21 मई को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि भी है। कुल 23 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, जिनमें तीन महिला विधायक भी शामिल हैं। विजय के करीबी मित्र और तूतिकोरिन विधानसभा सीट से निर्वाचित श्रीनाथ ने सबसे पहले मंत्री पद की शपथ ली। मोहम्मद फरवास जे. और एन. मैरी विल्सन अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं।

शपथ ग्रहण के दौरान राज्यपाल आर्लेकर ने कांग्रेस नेता राजेश कुमार को टोका और कहा कि वह केवल लिखित शपथ तक ही सीमित रहें। दरअसल, शपथ पढ़ते समय राजेश कुमार ने अचानक कांग्रेस नेताओं कामराज, राजीव गांधी और राहुल गांधी के नाम का उल्लेख किया, जिस पर राज्यपाल ने कहा, "यह आपकी शपथ का हिस्सा नहीं है।"

मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही तमिलनाडु में करीब छह दशक बाद कांग्रेस की सरकार में वापसी हुई है क्योंकि द्रविड़ दलों द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) ने कभी अपने सहयोगी दलों को सत्ता में हिस्सेदारी नहीं दी। इनमें कांग्रेस भी शामिल है, जिसने अलग-अलग समय पर दोनों दलों के साथ गठबंधन किया था।

तमिलनाडु में कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री एम. भक्तवत्सलम थे, जिन्होंने 1963 से 1967 तक मुख्यमंत्री पद संभाला था। तब इस राज्य को मद्रास कहा जाता था। स्वतंत्र भारत की पहली गैर-कांग्रेस सरकार 1967 में द्रविड़ नेता एवं द्रमुक संस्थापक सी.एन. अन्नादुरई ने बनाई थी।

उन्होंने तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की थी। टीवीके के शीर्ष नेता एवं लोक निर्माण तथा खेल विकास मंत्री आधव अर्जुन ने बुधवार को कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को सरकार में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री विजय ऐसा चाहते हैं। 

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