नेपाल सीमा से पुराने लखनऊ तक फैला नकली नोटों का जाल, वेब सीरीज देखकर सीख रहे छपाई; एजेंसियां अलर्ट

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
On

- राजधानी के कई इलाकों में फैला नेटवर्क, कार्रवाई के बाद भी सक्रिय - बड़े के स्थान पर छोटे भारी मात्रा में खपा रहा गिरोह

इंद्र भूषण दुबे/लखनऊ, अमृत विचार: राजधानी और आसपास के जिलों में पिछले पांच वर्षों में नकली नोट खपाने वाले कई गिरोह को पुलिस व एजेंसियों ने पकड़ा है। जांच के दौरान सामने आया कि इन गिरोह का नेटवर्क राजधानी के कई इलाकों में फैला है। इनका कनेक्शन प्रिंटिंग से लेकर नेपाल सीमा व डार्क वेब तक फैला हुआ है। आरोपियों ने कुबूल किया कि यूट्यूब व वेब सीरीज से नकली नोट छापने का तरीका सीखा है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में भारी मात्रा में नकली नोटों की बरामदगी की गई। कई छोटे गिरोह ऑनलाइन और सोशल मीडिया की मदद से नकली नोट बनाना सीख रहे हैं। यह पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है।

नकली नोटों की आपूर्ति करने वाले गिरोह पूरे देश में फैले हैं। इनका नेटवर्क यूपी की राजधानी में बड़े पैमाने पर है। खासकर पुराने लखनऊ व ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी जड़े काफी गहरे पहुंच गई है। पुलिस ने कई गिरोहों को जेल भेजा। इसके बाद भी यह खेल बंद नहीं हुआ। यहां तक कि नकली नोटों के खेल में वर्दी भी दागदार हुई। अगस्त 2023 में लखनऊ पुलिस ने पांच सदस्यों के एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया था। जो वेब सीरीज “फर्जी” से प्रेरित होकर नकली नोट तैयार कर रहा था। आरोपियों के पास से 100, 200 और 500 के हाई क्वालिटी नकली नोट, प्रिंटर, लैपटॉप और विशेष पेपर बरामद हुए थे। जांच में सामने आया था कि गिरोह सोशल मीडिया और डार्क वेब के जरिए सप्लाई नेटवर्क चला रहा था। विदेशी नागरिकों के फर्जी प्रोफाइल बनाकर भी लेनदेन किए जा रहे थे।

मदरसे में चल रहा था प्रिंटिंग यूनिट

वहीं, 2025 की शुरुआत में श्रावस्ती जिले में भारत-नेपाल सीमा के पास चल रहे एक बड़े नकली नोट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस के अनुसार यह नेटवर्क लखनऊ समेत कई जिलों में नकली नोट खपाने की तैयारी में था। जांच में सामने आया कि मदरसे की आड़ में प्रिंटिंग यूनिट चलाई जा रही थी। मौके से लैपटॉप, कलर प्रिंटर, स्पेशल इंक और नकली करेंसी बरामद की गई थी। मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी तरह 2024 में पूर्वांचल से लखनऊ तक नकली नोट सप्लाई करने वाले एक अन्य नेटवर्क का भी खुलासा हुआ। पुलिस ने पांच लाख रुपये से अधिक के नकली नोट बरामद किए थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक गिरोह के तार अंतरराज्यीय नेटवर्क और राजनीतिक संपर्कों से जुड़े होने की आशंका जताई गई थी।

साइबर कैफे व किराये के कमरों में छप रहे थे नकली नोट

एसटीएफ और लखनऊ कमिश्नरेट पुलिस ने पिछले कुछ वर्षों में कई छोटे मॉड्यूल भी पकड़े। इनमें साइबर कैफे और किराये के कमरों में नकली नोट छापे जा रहे थे। आरोपी फोटो पेपर, हाई-रेजोल्यूशन प्रिंटर और डिजाइन सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे। इन नोटों को बाजारों, पेट्रोल पंपों और ग्रामीण मंडियों में खपाने की योजना बनाई जाती थी।

यहां खपा रहे थे नकली नोट

सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में ऑनलाइन पेमेंट और छोटे दुकानदारों के जरिए नकली नोट खपाने वाले मॉड्यूल पर कार्रवाई हुई। ठाकुरगंज क्षेत्र में फोटो पेपर, कलर प्रिंटर और स्कैनर के जरिए नोट तैयार करने वाले छोटे नेटवर्क सामने आए। आलमबाग और चारबाग बेल्ट में रेलवे और बस अड्डा रूट के जरिए बाहर से लाई गई नकली करेंसी की सप्लाई रोकने के लिए लगातार अभियान चलाया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक काकोरी और मलिहाबाद क्षेत्र में ग्रामीण बाजारों और मंडियों में कम मूल्य के नकली नोट खपाने वाले गिरोह सक्रिय पाए गए।

ये भी पढ़ें  : 
ललितपुर में सतर्कता विभाग की बड़ी कार्रवाई, 1.5 लाख की घूस मांग रहे यूनानी डॉक्टर साहब, पहली किस्त लेते ही पहुंचे जेल

संबंधित समाचार

टॉप न्यूज