यूपी में गहराया स्मार्ट प्रीपेड मीटर का विवाद, जांच को लेकर उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की गुणवत्ता जांच को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्र सरकार की ऊर्जा क्षेत्र की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज (एनएबीएल) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को विस्तृत शिकायत भेजकर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की हाईटेक लैब पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की हाईटेक लैब को स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के भारतीय मानक आईएस 16444 के अंतर्गत परीक्षण का लाइसेंस प्राप्त नहीं है, इसके बावजूद प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच इसी लैब के माध्यम से कराई जा रही है। उपभोक्ता परिषद के अनुसार मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की ओर से जारी एक प्रेस नोट में दावा किया गया था कि उसकी हाईटेक लैब भारतीय मानक आईएस 13779, आईएस 14697 और आईएस 16444 के अनुरूप स्मार्ट मीटरों के एक्सेप्टेंस टेस्ट के लिए अधिकृत है।
हालांकि परिषद द्वारा एनएबीएल के लाइसेंस और स्कोप ऑफ एक्रीडिटेशन की जांच करने पर यह स्पष्ट हुआ कि लैब को आईएस 16444 के अंतर्गत स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच की मान्यता प्राप्त नहीं है। अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि इस संबंध में सभी साक्ष्यों सहित शिकायत प्रस्ताव एनएबीएल को भेजा गया था, जिस पर एनएबीएल ने शिकायत स्वीकार करते हुए समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में भी लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल किया गया है। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटरों के सामान्य परीक्षण अन्य मानकों के तहत हो सकते हैं, लेकिन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील तकनीकी परीक्षण केवल वही प्रयोगशाला कर सकती है, जिसे आईएस 16444 के अंतर्गत विधिवत मान्यता प्राप्त हो। उन्होंने बताया कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने 14 जुलाई 2023 को स्मार्ट मीटरों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किया था।
इसके बाद अगस्त 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उच्च गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया था। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष के अनुसार स्मार्ट मीटरों के महत्वपूर्ण परीक्षणों में इलेक्ट्रिकल रिक्वायरमेंट, ऊर्जा खपत, रेडियो तकनीक, संचार क्षमता, डाटा ट्रांसमिशन, साइबर सुरक्षा और एडवांस्ड टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े परीक्षण शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन सभी परीक्षणों को केवल अधिकृत प्रयोगशालाओं द्वारा ही किया जाना चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
