Biodiversity conservation: बरेली में लीलौर झील के बाद बदलेगी इस वेटलैंड की तस्वीर, WWF India की पहल
बरेली, अमृत विचार। जिले में जल स्रोतों और पर्यावरण को सहेजने की मुहिम और आगे बढ़ने वाली है। खंगवा श्याम, बहोड़ा खेड़ा, लीलौर झील, बिसरिया वेटलैंड के बाद, अब प्रशासन और डब्लूडब्लूएफ-इंडिया की नजर मीरगंज तहसील के ''पहुंचा बुजुर्ग'' वेटलैंड पर है। 15 हेक्टेयर में फैले इस दलदली क्षेत्र के जीर्णोद्धार के लिए डब्लूडब्लूएफ-इंडिया ने सीडीओ को प्रस्ताव पत्र भेज अनुमति मांगी। इसके लिए सहमति दे दी गई है।
वेटलैंड की होगी डी-सिल्टिंग
संस्था की ओर से इस वेटलैंड का सर्वे कराया जा चुका है, जिसमें इसके ढलान, गहराई और जल-धारण क्षमता का गहन अध्ययन किया गया। इस रिपोर्ट के आधार पर तैयार बहाली योजना के तहत वेटलैंड के अंदरूनी हिस्से में व्यापक रूप से गाद निकालने (डी-सिल्टिंग) का काम किया जाएगा। इससे पहले संस्था यहां के आउटलेट चैनल के करीब 2.2 किलोमीटर हिस्से को बहाल कर चुकी है, जिससे रामगंगा नदी के साथ इसका प्राकृतिक जुड़ाव बेहतर हुआ है। दावा है इस परियोजना से किसानों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी, क्योंकि मानसून के बाद जलभराव के कारण डूबने वाली उनकी कृषि योग्य भूमि सुरक्षित हो जाएगी।
डब्लूडब्लूएफ-इंडिया उठाएगा खर्च
प्रस्ताव के मुताबिक, इस पूरे कार्य का खर्च डब्लूडब्लूएफ-इंडिया खुद वहन करेगी और खोदाई से निकलने वाली मिट्टी का उपयोग वेटलैंड के भीतर ही छोटे जैव-विविधता द्वीप (माउंट्स) बनाने और ग्राम पंचायत की सहमति से आसपास के निचले इलाकों को भरने में किया जाएगा। संस्था के सहयोगी निदेशक अर्जित मिश्रा के अनुसार इस पूरे कार्य को पूरी पारदर्शिता के साथ जिला प्रशासन और संस्था की संयुक्त निगरानी में पूरा किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के इकोसिस्टम और भूजल स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
सीडीओ ने बताया प्राथमिकता
सीडीओ देवयानी ने बताया कि जल संरक्षण हमारी प्राथमिकता है। पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन और संस्था मिलकर संयुक्त निगरानी में वेटलैंड पुनरुद्धार का कार्य कराएंगे। साथ ही जिले के अन्य ब्लाकों में भी नए वेटलैंड्स को चिह्नित किया जाएगा ताकि उनका भी कायाकल्प किया जा सके।
