Pilibhit News : अपनों को खोने के दर्द के साथ झेलनी पड़ रही प्यास की पीड़ा, पोस्टमार्टम हाउस पर व्यवस्थाएं बदहाल !
पीलीभीत, अमृत विचार। अपनों को खोने का दर्द कम नहीं होता, लेकिन जिला मुख्यालय के पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचने वाले परिजनों को इस दर्द के साथ प्यास की पीड़ा भी झेलनी पड़ रही है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच शवों के पोस्टमार्टम का इंतजार कर रहे लोगों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। हालात ऐसे हैं कि कई परिवारों को पानी के लिए परिसर से बाहर भटकना पड़ता है। बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस स्थल पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। इस समस्या से सिर्फ लोग ही नहीं, पोस्टमार्टम हाउस का स्टाफ भी परेशान है। सिर्फ जिम्मेदार सुध नहीं ले सके हैं।
बता दें कि इन दिनों गर्मी की मार लोगों को बेहाल कर रही है। बीते दिनों पारा 42 डिग्री सेल्सियस के भी पार जा चुका है। हालांकि करीब तीन दिन से इसमें हल्की गिरावट हुई है। मगर, गर्मी का सितम बरकरार है। वैसे तो प्रशासन ने गर्मी के बीच अलर्ट करते हुए सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल के इंतजाम कराने की जिम्मेदार नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर से करने के निर्देश भी दिए हैं। नगर पालिका के स्तर से कई चौराहों पर वाटर कूलर रखवाए गए हैं। वहीं, ई-रिक्शा की सेवा भी चल रही है। जिसमें राहगीरों को शीतल जल मुहैया कराया जा रहा है। मगर, कचहरी से जेल रोड पर बने पोस्टमार्टम हाउस पर हालात अभी भी बदतर ही हैं। रोजाना विभिन्न थाना क्षेत्रों से शव लेकर आने वाले परिजनों को कई-कई घंटे इंतजार करना पड़ता है। दुख और तनाव के माहौल में मौजूद महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की बन रही है। मौके पर शीतल जल की छोड़िए साफ पानी ही पीने के लिए मिल जाए तो राहत हो। मगर, इसे लेकर कोई इंतजाम नहीं है। मंगलवार को भी न्यूरिया और दियोरियाकलां क्षेत्र से मृतकों परिवार पोस्टमार्टम हाउस पर पीने के पानी के लिए परेशान दिखे। स्टाफ भी इस दिक्कत को लेकर अपनी पीड़ा साझा करता रहा। उन्होंने बताया कि अगर पाने के पानी की व्यवस्था कर दी जाए तो गमजदा परिवार को पानी के लिए तो कम से कम परेशान नहीं होना पड़ेगा। कचहरी तिराहा पर जाकर लोग प्यास बुझाने को मजबूर हैं। अधिकांश को पानी की बोतल खरीदना पड़ती है।
समाधान नहीं, एक दूसरे पर टालने पर अधिक ध्यान
इस समस्या का समाधान करने के बजाय टालमटोल पर अधिक ध्यान है। नगर पालिका के जिम्मेदारों का तर्क है पोस्टमार्टम हाउस स्वास्थ्य विभाग के अधीन है। ऐसे में यहां पेयजल की व्यवस्था भी स्वास्थ्य विभाग को करानी चाहिए। उधर, स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार पहले ही समस्या को लेकर निगाहें फेरे हुए हैं। विभागों के बीच जिम्मेदारी तय करने की बहस जारी है। मगर, पोस्टमार्टम हाउस पर बैठे परिजनों का सवाल यही है कि भीषण गर्मी में उनकी प्यास आखिर कौन बुझाएगा।
नल पर काई, परिसर में झाड़ियां, कब से नहीं हुई सफाई
पोस्टमार्टम हाउस परिसर में अव्यवस्थाओं की भरमार है। परिसर में एक इंडिया मार्का हैंडपंप लगा है। मगर स्टाफ और शव लेकर पहुंचने वाले परिजन के अनुसार, उससे निकलने वाला पानी पीने लायक नहीं है। उसके आसपास खासा काई जमी हुई है। परिसर में फैली झाड़ियां देख स्पष्ट है कि यहां लंबे समय से नियमित सफाई और रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। हालात बेहद बदतर बने हुए हैं।
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