प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, पहले भारतीय ग्रैंडमास्टर ने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर जीता Norway Chess का खिताब
ओस्लो। ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा इतिहास रचते हुए अंतिम दौर में जर्मनी के विन्सेंट कीमर को हराकर प्रतिष्ठित नार्वे शतरंज का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बन गए। भारत के स्टार आर प्रज्ञानानंदा ने नार्वे शतरंज में जीत को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि महान खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन सहित दुनिया के कुछ सबसे मजबूत खिलाड़ियों को हराने से यह खिताब और भी यादगार बन गया है। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की। उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की।
चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे।
मैग्नस कार्लसन को हराकर जीता ऐतिहासिक खिताब
नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया।
नॉर्वे शतरंज का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय बने
अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी। हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता।
प्रज्ञानानंदा ने कहा, 'मेरे करियर की सबसे बड़ी जीत'
विन्सेंट कीमर के खिलाफ आखिरी दौर में जीत के बाद प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''मुझे लगता है कि यह मेरे करियर की सबसे बड़ी जीत है। औसत रेटिंग के मामले में भी यह अधिक मजबूत है। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि विज्क आन जी (टाटा स्टील शतरंज टूर्नामेंट) में कुछ खिलाड़ी 2600 रेटिंग वाले होते हैं लेकिन यहां सिर्फ शीर्ष खिलाड़ी हैं।''
प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''इसे जीतना अधिक खास है और इसमें यह बात भी जुड़ जाती है कि मैग्नस वहां थे। साथ ही लगातार चार बाजी जीतना भी।'' प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''मैं खुश था कि वह मैच (सो बनाम अलीरेजा) ड्रॉ रहा... मुझे बस जीतना था और मुझे (कीमर के खिलाफ) जीतना ही था।'' प्रज्ञानानंदा ने कहा कि टूर्नामेंट में शुरुआती झटकों के बाद भी उनके खेलने के तरीके में कोई खास बदलाव नहीं आया जिससे उन्हें लगातार चार जीत मिली और वे खिताब जीतने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि एक अहम बदलाव यह था कि उन्होंने जानबूझकर 'टाइम ट्रबल' (समय की कमी) से बचने और पूरे टूर्नामेंट के दौरान तेजी लेकिन संयम के साथ शतरंज खेलने की कोशिश की।
प्रज्ञानानंदा ने कहा, ''मुझे नहीं लगता कि मैंने कुछ खास बदलाव किया लेकिन तेजी से खेलने की इस कोशिश से निश्चित रूप से मेरे खेल में मदद मिली। अधिक मुकाबलों में मेरे पास अपने प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में अधिक समय था।'' इस युवा भारतीय ग्रैंडमास्टर ने कहा कि वे अपने कार्यक्रम और काम के बोझ को बेहतर ढंग से संभालने के लिए पिछले साल की तुलना में कम टूर्नामेंट खेलने की योजना बना रहे हैं।
आनंद और गुकेश भी नहीं कर पाए ये कमाल
खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। इस बीच गुकेश का निराशाजनक सफर जारी रहा। टूर्नामेंट में उनकी तीसरी मौजूदगी भी उस कामयाबी के बिना खत्म हुई जिसकी उन्हें उम्मीद थी, विशेषकर ऐसे साल में जब उन्हें चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ अपने विश्व खिताब का बचाव करना है। आखिरी दौर में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने क्लासिकल बाजी में 20 साल के गुकेश को हराकर तीन अंक हासिल किए। नार्वे का यह दिग्गज हालांकि इस जीत के बावजूद 13 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
'पहले भारतीय बनने पर देश को गर्व' प्रज्ञानंद की जीत पर गौतम अडानी
गौतम अडानी अडानी स्पोर्ट्सलाइन ने शनिवार को ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानंद आर को नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट 2026 का खिताब जीतने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि पूरे देश को उनके इस प्रतिष्ठित टॉफी जीतने वाले पहले भारतीय बनने पर गर्व है। 20 साल के भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रज्ञानंद ने दुनिया नंबर वन मैग्नस कार्लसन, मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश डी, अलीरेजा फिरोजा, वेस्ली सो और विंसेंट कीमर जैसे खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए नॉर्वे शतरंज का खिताब जीता।
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने नॉर्वे चेस जीतने वाले पहले भारतीय बनने पर प्रज्ञानंद को बधाई दी और इस उपलब्धि को "चेस की दुनिया में सहनशक्ति, बुद्धि और स्वभाव की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक" बताया। उन्होंने कहा कि खेल के सबसे बड़े मंचों में से एक पर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों को हराना एक शानदार उपलब्धि है। उन्होंने युवा ग्रैंडमास्टर के निडर, फोकस्ड और पूरी तरह से भारतीय जज़्बे की भी तारीफ की। चेयरमैन ने कहा कि प्रज्ञानंद उभरते हुए, युवा भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक हैं और पूरे देश को उनकी इस उपलब्धि पर बहुत गर्व है।
अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) के निदेशक प्रणव अडानी ने कहा, "दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक, नॉर्वे चेस को जीतने वाले पहले भारतीय बनकर प्रज्ञानंद ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह भारतीय शतरंज और भारतीय खेल जगत के लिए गर्व का क्षण है। हमें उन पर और ओस्लो में उन्होंने जो कुछ भी हासिल किया है, उस पर बहुत गर्व है। वह भारतीय शतरंज और भारतीय खेल जगत को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं और उनका सफर देश भर के अनगिनत युवा लड़के-लड़कियों को शतरंज अपनाने और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा। हम आने वाले वर्षों में उनकी निरंतर सफलता की कामना करते हैं।
