UP News : अलनीनों के प्रभाव से पशुओं का बचाव, गौशालाओं में करें भरपूर भूसा-चारे का प्रबंध-एसीएस
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने गो-आश्रय स्थलों के आसपास छायादार पौधे लगाने के दिए निर्देश
भीषण गर्मी में पशुओं को लू और मौसम की मार से बचाएं। पशु पालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार मेश्राम ने बरेली में पशु चिकित्सा अधिकारियों को यह निर्देश दिया है। गौशालाओं में चारे-पानी की व्यवस्था अच्छी रहे और निराश्रित गोवंश को आश्रय स्थलों में रखें।
अमृत विचार : उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने अलनीनो के प्रभाव को देखते हुए सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि पशुओं के लिए भरपूर भूसा-चारे की व्यवस्था बनाएं। पशुओं को लू-गर्मी से बचाने के इंतजाम करें। गौ-आश्रय स्थालों के आसपा छायादार वृक्ष लगाएं। आईएएस मुकेश कुमार मेश्राम ने बरेली में अधिकारियों के साथ बैठक में ये निर्देश दिए हैं।
निराश्रित गोवंश संरक्षण को लेकर बनाए गए आश्रय स्थलों के संचालन और गोवंशों के भरण-पोषण को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की।
उन्होंने कहा कि अलनीनों का असर को लेकर तैयारियों की जरूरत है। निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों में संरक्षित किए जाएं। संरक्षित पशुओं के लिए चारे का संकट न हो, इसका विशेष ध्यान रखें। इसके लिए पहले से ही भूसा और चारे का प्रबंधक करके रखें।
कुपोषित परिवारों को दें गोवंश
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि कुपोषित परिवारों को सहभागिता योजना से जोड़ें। उन्हें गोवंशीय पशु प्रदान करें। गाय के दूध से ऐसे परिवारों को स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि चारागाह की भूमि पर घास उगाएं।
गौ-आश्रय स्थलों पर किसी भी सूरत में भूसा-चारे का संकट नहीं होना चाहिए। गोवंशीय पशुओं को मौसम की मार से भी बचाना है। इसलिए गौआश्रय स्थलों में भूसा-चारे के साथ लू और गर्मी से भी राहत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। गौशालाओं को टाट के पर्दे से ढकें। पानी की व्यवस्था सही रखें। अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति भी देखें। आश्रय स्थलों के आसपास छायादार वृक्षों के पौधे लगाएं, ताकि पशुओं को गर्मी से राहत मिल सके।
योजनाओं का लाभ दिलाएं
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि ग्रामीणों के लिए पशुपालन विभाग तमाम योजनाएं चला रहा है। सहभागिता योजना, नन्दिनी, मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना, भेड़/बकरी/सूकर योजना के बारे में आम लोगों को जागरुक किया जाए। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इन जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले सकें।
बीएल कामधेनु फॉर्म देखा
इससे पहले उन्होंने बरेली में बीएल एग्रो कंपनी द्वारा संचालित बीएल कामधेनु फॉर्म्स और लीड जेनेटिक्स फॉर्म का दौरा किया। यह आधुनिक फॉर्म करीब 25 एकड़ में फैला है।
