Bareilly News: मंडल में बाढ़ से निपटने को बड़ी तैयारी, 29 बड़ी परियोजनाओं को पूरा करने को पसीना बहा रहे विभाग 

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Published By Monis Khan
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15 जून तक सब कुछ सही करने की कवायद, 139 करोड़ की परियोजनाओं पर दिन-रात चल रहा काम

मौसम विभाग ने अबकी बार अच्छी मानसूनी कृपा बरसने की भविष्यवाणी की है तो इससे बरेली मंडल में बाढ़ की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। बरेली में रामगंगा, बहगुल, पीलीभीत में शारदा-देवहा, बदायूं में गंगा और शाहजहांपुर में गंगा-गर्रा जैसी नदियों का इतिहास सबको फिर टेंशन में डाल रहा है। बाढ़ की आंशका के चलते मंडल प्रशासन ने अभी से जरूरी तैयारियां शुरू कर दी हैं। 

बरेली, अमृत विचार। मौसम विभाग ने अबकी बार अच्छी मानसूनी कृपा बरसने की भविष्यवाणी की है तो इससे बरेली मंडल में बाढ़ की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। बरेली में रामगंगा, बहगुल, पीलीभीत में शारदा-देवहा, बदायूं में गंगा और शाहजहांपुर में गंगा-गर्रा जैसी नदियों का इतिहास सबको फिर टेंशन में डाल रहा है। बाढ़ की आंशका के चलते मंडल प्रशासन ने अभी से जरूरी तैयारियां शुरू कर दी हैं। 

15 जून तक काम पूरा करने की हिदायत
बाढ़ खंड 139 करोड़ के बजट से 29 परियोजनाएं पूरी करने में जुटा है। तटबंधों की तेजी से मरम्मत और कटान रोकने के लिए जरूरी जतन किए जा रहे हैं। अफसरों को 15 जून तक सभी काम पूरा करने की हिदायत दी गई है। मंडलायुक्त भूपेन्द्र एस. चौधरी ने सभी डीएम और सिंचाई अफसरों को समय रहते बाढ़ से बचाव के इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।

पीलीभीत और बदायूं अतिसंवेदनशील
अफसरों के अनुसार, अतीत के बाढ़ मंजर ध्यान में रखकर मंडल प्रशासन ने पीलीभीत और बदायूं जिलों को अतिसंवेदनशील घोषित किया है, जबकि बरेली और शाहजहांपुर सूची में रखा गया है। पूरे मंडल में कुल 12 बड़े तटबंध हैं। 160.885 किलोमीटर लंबे तटबंधों के दायरे में आने वाले 69 स्थानों को विशेष निगरानी के दायरे में लिया गया है। इनमें 17 स्थल अत्यधिक संवेदनशील और 52 संवेदनशील माने गए हैं। भारी बारिश के दौरान तटीय गांवों में बाढ़ का पानी रोकने को ऐसे सभी खतरनाक पॉइंट पर बोल्डर पिचिंग, स्पर मरम्मत और जियो बैग लगाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। मंडल में सबसे बड़ा सुरक्षा कवच पीलीभीत जिले में तैयार हो रहा है, जहां 44.50 करोड़ की लागत से रिकॉर्ड 11 बाढ़ परियोजनाएं चल रही हैं। इसके अलावा, बदायूं में 43 करोड़ की पांच परियोजनाएं, बरेली में 29 करोड़ की सात और शाहजहांपुर में 22.5 करोड़ की छह परियोजनाओं पर काम अंतिम चरण में है।

बाढ़ चौकियों पर मुस्तैद रहेंगे कर्मचारी
चारों जिलों के डीएम ने सम्बंधित विभागों के साथ बैठक कर पहले ही बाढ़ चौकी व जरूरी राहत-बचाव इंतजामों की प्लानिंग कर ली है। सिंचाई और राजस्व अधिकारियों को बाढ़ चौकियों पर समय रहते स्टाफ तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। मानसून के समय में बाढ़ चौकियां ही संवेदनशील इलाकों पर नजर रखती हैं और बाढ़ के हालात पैदा होने से पहले ही लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद करती हैं।

पहाड़ों पर बारिश होते ही उफनती हैं नदियां
भोगोलिक रूप से देखें तो उत्तराखंड व नेपाल से सटे पीलीभीत में शारदा और देवहा जैसी 10 प्रमुख नदियां बहती हैं। पहाड़ों पर होने वाली भारी बारिश के कारण शारदा हर बार मुहाने तोड़कर आबादी वाले इलाकों में बाढ़ के हालात पैदा करती हैं। पीलीभीत में कटना, शारदा और कैलाश नदी के तटों पर तेजी से कटान रोकने को काम किए जा रहे हैं। बदायूं गंगा, रामगंगा और महावा जैसी छह नदियों के चलते बेहद संवेदनशील है। यहां गंगा नदी के बाएं किनारे पर बने उसहैत और गंगा-महावा तटबंधों को मजबूत करने का काम लगभग 70 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।

बरेली-शाहजहांपुर में तटबंध मजबूत किए जा रहे
संवेदनशील जिलों की सूची में शामिल बरेली और शाहजहांपुर में भी मानसून से पहले सुरक्षा घेरा मजबूत किया जा रहा है। बरेली जिले में रामगंगा, देवहा, किच्छा और बहगुल सहित कुल 14 नदियां बहती हैं। बरेली के किच्छा नदी पर बने कंचनपुर प्रोजेक्ट और देवहा नदी के अमीरनगर प्रोजेक्ट का काम 65 से 75 प्रतिशत तक पूरा कर लिया गया है, ताकि जून के अंत तक इन्हें चालू किया जा सके। दूसरी तरफ, शाहजहाँपुर में बहगुल, गर्रा, देवहा और गोमती जैसी 6 नदियां बाढ़ का कारण बनती हैं। शाहजहांपुर में गर्रा और देवहा नदी के दाहिने किनारों पर स्थित गांवों को कटान से बचाने के लिए कुल छह परियोजनाओं पर काम चल रहा है। प्रशासन लगातार इन कार्यों की मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि बारिश शुरू होने से पहले काम पूरा हो सके।

जानिए क्या बोले मंडलायुक्त
मंडलायुक्त बरेली भुपेंद्र एस चौधरी ने बताया कि मंडल के जिलों में बाढ़ की आशंका को ध्यान में रखकर सम्बंधित विभागों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अफसरों से जरूरी इंतजाम करने को कहा गया है। जल्द ही बैठक कर व्यापक रणनीति बनाई जाएगी। आगामी समय में अगर बाढ़ का सामना करना पड़े, उसके लिए पहले से प्लानिंग तैयार रहेगी।

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