जागृति शुक्ला मौत मामला : हाईकोर्ट ने न्यायिक जांच के दिए आदेश, जानें पूरा मामला
प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण युवा अधिवक्ता जागृति शुक्ला की मौत के मामले में सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुण टंडन से न्यायिक जांच कराने का बुधवार को आदेश दिया। दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की पीठ ने याचिकाकर्ताओं तथा राज्य सरकार के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चिकित्सीय लापरवाही के कारण महिला अधिवक्ता की मृत्यु हुई। अदालत ने अधिवक्ताओं को सड़क जाम नहीं करने और चिकित्सकों को हड़ताल पर नहीं जाने का भी निर्देश दिया। अमित कुमार सिंह और ममता सिंह द्वारा दायर याचिकाएं उस महिला अधिवक्ता की मौत से संबंधित हैं, जो एक सड़क दुर्घटना में घायल हुई थीं। जागृति को 20 मई को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
बाद में उन्हें लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई रेफर किया गया था जहां आठ जून को उनकी मौत हो गई। दोनों याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि जांच एजेंसी निष्पक्ष जांच नहीं कर रही है और चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों में घिरे चिकित्सकों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे पहले नौ जून को अदालत ने राज्य सरकार के वकील को मामले की जांच की प्रगति से अवगत कराने का निर्देश दिया था। इसके बाद सुनवाई के लिए बुधवार की तिथि निर्धारित की गई थी।
मामले में एक महिला अधिवक्ता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। वहीं अधिवक्ता दुर्घटना के बाद जागृति को स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल लेकर गई थीं, जहां उन्हें आपातकालीन वार्ड में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अधिवक्ताओं का आरोप है कि पीड़िता का समय पर उपचार नहीं किया गया और कनिष्ठ चिकित्सकों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया, जिससे अस्पताल परिसर में तनाव और हिंसा की स्थिति उत्पन्न हो गई।
