बरेली: हरसहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स प्रकरण- कार्रवाई पर अफसर चुप, सब मैनेज कर लेने की हो रही चर्चा
अमृत विचार, बरेली। जिस तरह से हरसहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स के ठिकानों पर आयकर की छापेमारी हुई उससे यही माना जा रहा था कि सर्राफा कारोबारी के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई होगी लेकिन 90 घंटे तक चली कार्रवाई को अभी तक आयकर विभाग ने सार्वजनिक नहीं किया है। इससे कई सवाल उठ रहे हैं। बड़े उद्यमियों और …
अमृत विचार, बरेली। जिस तरह से हरसहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स के ठिकानों पर आयकर की छापेमारी हुई उससे यही माना जा रहा था कि सर्राफा कारोबारी के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई होगी लेकिन 90 घंटे तक चली कार्रवाई को अभी तक आयकर विभाग ने सार्वजनिक नहीं किया है। इससे कई सवाल उठ रहे हैं। बड़े उद्यमियों और व्यापारियों के बीच चर्चा तेजी से चल रही है कि कारोबारी और आयकर के बड़े अधिकारियों के बीच सांठगांठ हो गई। इसी वजह से कार्रवाई को सार्वजनिक करने में इतनी देर की जा रही है।
चार दिन के बाद भी लखनऊ में आयकर विभाग के अधिकारियों के प्रेस कान्फ्रेंस न करना किसी के गले नहीं उतर रहा है। शहर में यह भी बात उठ रही है कि कई बड़े नेता लखनऊ में बैठे अफसरों के जरिये मामले को निपटाने की कोशिश में लगे हैं। ये सभी कारोबारी के करीबी बताए जा रहे हैं। छापेमारी में बेनामी संपत्ति, जेवर और करोड़ों रुपये की नगदी के अलावा संदिग्ध कागजात भी बरामद हुए हैं।
शहर की बात करें तो सोने-चांदी का मुख्य बाजार आलमगिरीगंज में है। इसके अलावा सिविल लाइंस, राजेंद्र नगर समेत कुछ स्थानों पर जेवरात के बड़े शोरूम हैं। सर्राफा कारोबारी बताते हैं कि आलमगिरीगंज के अलावा गली-मोहल्लों के अधिकांश छोटे स्वर्णकार बड़े ज्वैलर्स के यहां सोना गिरवी रखकर रुपये ले लेते हैं। जहां से उन्हें करीब एक प्रतिशत तक के ब्याज का लाभ मिलता है।
अधिकांश कारोबारियों ने हरसहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स के यहां गांठें गिरवी रखी हैं। सूत्र बताते हैं कि आयकर टीम को जांच में बड़ी संख्या में ऐसी गांठें मिलीं जिनके मालिक व इससे जुड़े हिसाब के बारे में कारोबारी नहीं बता सका था। इसके बाद से छोटे कारोबारियों में बेचैनी देखी जा रही है मगर बड़े स्वर्णकारों का अब भी यही कहना है कि सब मैनेज हो जाएगा।
यह है पूरा मामला
लखनऊ आयकर इन्वेस्टिगेशन महानिदेशक के निर्देश पर आयकर विभाग की संयुक्त टीम ने मंगलवार सुबह एक साथ बरेली, मुरादाबाद, बदायूं और लखनऊ में हरसहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स के घर व प्रतिष्ठानों पर छापा मारा था। छापेमारी भोर में उस वक्त की गई थी जब कारोबारी व उसका परिवार नींद से जाग भी नहीं पाया था। इस दौरान टीम ने कारोबारी के सिविल लाइंस स्थित एचएसजे के शोरूम और डोहरा रोड स्थित बंगले पर छापेमारी कर आयकर से संबंधित अभिलेख खंगाले थे।
शुरू में करीब एक दर्जन अधिकारी कार्रवाई में जुटे थे पर बाद में बड़े आयकर की हेराफेरी के सबूत मिलने पर संख्या बढ़ा दी गई। सूत्रों की मानें तो बैंक रिकार्ड खंगालने के साथ ही जेवरातों के स्टॉक और रिकार्ड के मिलान में टीम को बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली थी। बेनामी संपतियों के मामले में तो कारोबारी सवालों के जवाब तक नहीं दे सका था। टीम जल्द ही बड़ा खुलासा करने का दावा करती रही। इसके बाद खेल उजागर होने पर अचानक इरादा बदल गया और मैनेज करने में जुटी टीम खुलासा करने के लिए बिना प्रेस कांफ्रेंस किए ही लखनऊ लौट गई।
ऐसे कम होती गई कोराबारी पर सख्ती
मंगलवार को भोर में अचानक हरसहायमल श्यामलाल ज्वैलर्स के घर और प्रतिष्ठानों पर छापेमारी से कारोबारियों में हड़कंप मच गया था। पहले दिन की जांच-पड़ताल के दौरान अफसरों ने दूसरे दिन भी जांच जारी रखने की बात कही। इससे बड़ी गड़बड़ी का अंदेशा है। दूसरे दिन कर्मचारियों से पूछताछ और रात भर नोटों की गिनती का चर्चा रही। तीसरे दिन एक नेता ने इस प्रकरण को लेकर पैरवी शुरू कर दी। कई बड़े कारोबारी भी बचाव में उतर गए। इस पर टीम की कार्रवाई ढीली पड़ गई। सके बाद चौथे दिन टीम से जड़े कुछ अफसरों ने जांच शाम तक पूरी होने की बात कहकर प्रेस कांफ्रेंस करने की बात कही लेकिन टीम रातों रात निकल गई।
