MP : 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी, शिवपुरी के नरवर किले की सुरक्षा पर उठे सवाल
शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से करीब 400 वर्ष पुरानी एक तोप चोरी होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, चोरी की घटना बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अज्ञात बदमाश किसी वाहन से किले के पिछले हिस्से तक पहुंचे और वहां रखी ऐतिहासिक तोप को उठाकर फरार हो गए।
किले की सुरक्षा में बड़ी चूक?
करैरा के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) प्रशांत शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि मामले के हर पहलू की जांच की जा रही है। एसडीओपी ने यह भी कहा कि इस चोरी में किसी अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह की संलिप्तता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पुलिस उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी माध्यमों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है।
पुरातत्व विभाग ने जताई चिंता
राज्य पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक तरुण कुमार श्रीवास्तव ने इस घटना को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि वह खुद नरवर किले पहुंचकर स्थिति का जायजा लेंगे और पुलिस के साथ समन्वय कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि ऐतिहासिक धरोहर को जल्द से जल्द बरामद किया जाए और चोरी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कुछ दिन पहले गिरी थी तोप, नहीं हो पाई थी सुरक्षित
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, चोरी गई तोप कुछ दिन पहले अपने निर्धारित स्थान से नीचे गिर गई थी। इसके बाद उसे दोबारा सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया था। इसी दौरान मौका पाकर चोरों ने उसे निशाना बना लिया। अधिकारियों के अनुसार, नरवर किले में पहले कुल 14 ऐतिहासिक तोपें मौजूद थीं, लेकिन अब इनमें से केवल 13 तोपें ही बची हैं।
सीसीटीवी और संभावित रास्तों की जांच
पुलिस अब किले के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रही है। साथ ही, उन संभावित रास्तों का पता लगाया जा रहा है, जिनसे चोर तोप को लेकर फरार हुए होंगे। नरवर किले की यह तोप ऐतिहासिक महत्व रखती थी। ऐसे में इसकी चोरी को केवल एक चोरी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण विरासत को नुकसान पहुंचाने वाली घटना के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि जांच के जरिए जल्द ही इस मामले का खुलासा होगा और ऐतिहासिक धरोहर वापस मिल सकेगी।
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