'राम मंदिर चंदा घोटाला देश के किसी धार्मिक स्थल की सबसे बड़ी लूट', बोले कांग्रेस सांसद वेणुगोपाल- संसद में उठाएंगे मुद्दा

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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कांग्रेस नेता ने कहा- सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग; प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने अयोध्या राम मंदिर चंदा मामले को देश के किसी धार्मिक स्थल की सबसे बड़ी कथित लूट बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की।

त्रिशूर (केरल)/अमृत विचार। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने अयोध्या के राम मंदिर को मिले चंदे के कथित गबन को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे "भारत के किसी भी धार्मिक स्थल पर अब तक की सबसे बड़ी लूट" बताते हुए कहा कि कांग्रेस आगामी संसद सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब मांगेगी।

गुरुवायूर मंदिर के बाहर पत्रकारों से बातचीत में वेणुगोपाल ने कहा कि इस कथित घोटाले से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई है, लेकिन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अब तक इस मामले पर चुप हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की एसआईटी जांच के पीछे वास्तविक दोषियों को बचाने की मंशा है। कांग्रेस महासचिव ने मांग की कि मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान हो।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े संगठनों ने वर्षों तक मंदिर के नाम पर श्रद्धालुओं से चंदा जुटाया और अब उसी धन और सोने में कथित गड़बड़ी सामने आई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर ट्रस्ट के जिन पदाधिकारियों की नियुक्ति हुई, वह प्रधानमंत्री की निगरानी में हुई थी।

भाजपा-आरएसएस पर वेणुगोपाल ने लगाया बड़ा आरोप

उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा कि उनकी दिलचस्पी केवल हिंदुओं के नाम पर राजनीति करने और लोगों को बांटने में है। उनके अनुसार, यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। वेणुगोपाल ने यह भी सवाल उठाया कि भाजपा की केरल इकाई इस मामले पर चुप क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चुप्पी वास्तविक दोषियों को बचाने का संकेत देती है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों से जुड़े मामलों में भी इसी प्रकार के आरोप सामने आ रहे हैं।

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