Monaco Diamond League: किसान के बेटे सर्वेश कुशारे ने रचा इतिहास, डायमंड लीग में पदक जीतने वाले बने पहले भारतीय हाई जम्पर 

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Published By Anjali Singh
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मोनाको। भारत के स्टार एथलीट और राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक सर्वेश कुशारे ने मोनाको डायमंड लीग में इतिहास रच दिया है। ऊंची कूद (High Jump) स्पर्धा में भाग लेते हुए 31 वर्षीय सर्वेश ने अपने पदार्पण (डेब्यू) पर ही तीसरा स्थान हासिल किया। इसके साथ ही वह प्रतिष्ठित डायमंड लीग प्रतियोगिता में शीर्ष तीन में जगह बनाने वाले भारत के पहले हाई जम्पर और कुल चौथे एथलीट बन गए हैं। इस विशिष्ट क्लब में सर्वेश से पहले केवल भाला फेंक (जैवलीन थ्रो) सुपरस्टार नीरज चोपड़ा, लंबी कूद के खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर और चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो) के पूर्व एथलीट विकास गौड़ा ही शामिल थे।

विश्व चैंपियंस को पछाड़कर 2.26 मीटर की लगाई छलांग

भुवनेश्वर में राष्ट्रीय अंतरराज्यीय चैंपियनशिप के दौरान 2.31 मीटर का नया नेशनल रिकॉर्ड बनाने के महज दो सप्ताह बाद सर्वेश इस वैश्विक प्रतियोगिता में उतरे थे। दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ियों की मौजूदगी में उन्होंने 2.26 मीटर की शानदार कूद लगाकर पोडियम (तीसरा स्थान) पर कब्जा जमाया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के दौरान सर्वेश ने कतर के तीन बार के विश्व चैंपियन व तोक्यो ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता मुताज़ एस्सा बरशिम और अमेरिका के जुवॉन हैरिसन जैसे दिग्गज स्टार खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया। बरशिम इस स्पर्धा में महज 2.20 मीटर ही कूद सके और संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे। प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक यूक्रेन के ओलेह डोरोशचुक (2.32 मीटर) और रजत पदक ग्रेट ब्रिटेन के जैक किमानी (2.30 मीटर) ने जीता।

मक्के के छिलके और कपास के गद्दे से शुरू हुआ था सफर

सर्वेश कुशारे की यह कामयाबी इसलिए असाधारण है क्योंकि उनकी शुरुआत बेहद संघर्षपूर्ण रही है। महाराष्ट्र के नासिक जिले के देवरगांव गांव में प्याज की खेती करने वाले एक आम किसान के घर जन्मे सर्वेश के पास बचपन में अभ्यास के लिए बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं। शुरुआती दिनों में उनके पिता और बचपन के कोच ने उनके लिए मक्के के छिलके, सूखी घास और कपास को मिलाकर एक अस्थायी 'लैंडिंग पिट' (कूदने का गद्दारूपी गड्डा) तैयार किया था, जिस पर वो दिन-रात अभ्यास किया करते थे। शुरुआती दिनों में उनके पिता और बचपन के कोच ने उनके लिए मक्के के छिलके, सूखी घास और कपास को मिलाकर एक अस्थायी 'लैंडिंग पिट' (कूदने का गद्दारूपी गड्डा) तैयार किया था, जिस पर वो दिन-रात अभ्यास किया करते थे।

रिकॉर्ड्स का सफर और भविष्य का लक्ष्य

2018: इंडियन ओपन में पहला राष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीता।

2022: गुजरात राष्ट्रीय खेलों में 2.27 मीटर की कूद के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया।

2025: तोक्यो विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय हाई जम्पर बने और छठा स्थान हासिल किया।

2026 (27 जून): भुवनेश्वर में 2.31 मीटर की कूद लगाकर तेजस्विन शंकर का 8 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा।

मौजूदा सत्र में सर्वेश कुशारे विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की सूची में संयुक्त रूप से चौथे और एशियाई खिलाड़ियों में पहले स्थान पर काबिज हैं। अपनी इस सफलता पर सर्वेश ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा, "2015-16 से पहले कोई भी भारतीय 2.20 मीटर से ऊपर नहीं जा पा रहा था। तेजस्विन ने जब इसे पार किया, तो मुझे भी भरोसा हुआ कि मैं यह कर सकता हूँ। मेरा अगला लक्ष्य निकट भविष्य में 2.35 मीटर की ऊंचाई को पार करना है।"

 

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