बोध कथा : कर्म का महत्व

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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एक राज्य में दो गांवों के बीच एक चौड़ी नदी बहती थी। बरसात के दिनों में नदी इतनी उफान पर होती कि दोनों गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाता। लोगों को कई किलोमीटर घूमकर दूसरे गांव जाना पड़ता था। राजा ने नदी पर पुल बनवाने का निर्णय लिया और काम की जिम्मेदारी एक प्रसिद्ध शिल्पकार को सौंप दी।

शिल्पकार के साथ उसका एक युवा सहायक भी था। वह बहुत प्रतिभाशाली था, लेकिन जल्द नाम और सम्मान पाने की इच्छा रखता था। कुछ ही दिनों में उसने पुल का आधा काम पूरा कर लिया और लोगों से अपनी प्रशंसा सुनने लगा।

एक दिन उसने गुरु से कहा, “गुरुजी, पुल तो लगभग बन गया है। अब इतनी मेहनत करने की क्या जरूरत? लोग तो अभी से हमारी तारीफ कर रहे हैं।” गुरु मुस्कराए, लेकिन कुछ नहीं बोले। कुछ दिनों बाद उन्होंने अपने शिष्य से कहा, “आज रात हम पुल का निरीक्षण करेंगे।” रात में दोनों पुल पर पहुंचे। गुरु ने शिष्य से कहा, “अब इस पुल पर चलकर नदी पार करो।” जैसे ही शिष्य पुल के बीच पहुंचा, उसने देखा कि आगे का हिस्सा अधूरा था। वह घबरा गया और वापस लौट आया।

गुरु ने शांत स्वर में पूछा, “क्या हुआ? तुम तो कह रहे थे कि पुल बन चुका है।” शिष्य ने सिर झुकाकर कहा, “गुरुजी, आधा पुल किसी काम का नहीं। जब तक अंतिम पत्थर नहीं जुड़ता, तब तक कोई सुरक्षित नदी पार नहीं कर सकता।” गुरु ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “यही बात जीवन पर भी लागू होती है। अधूरी मेहनत, अधूरा ज्ञान और अधूरी जिम्मेदारी कभी सफलता नहीं दिला सकती। लोग शुरुआत देखकर ताली बजा सकते हैं, लेकिन असली पहचान काम पूरा होने पर ही मिलती है।”

शिष्य की आंखें खुल गईं। उसने अगले कई सप्ताह पूरी लगन से पुल का निर्माण किया। जब पुल तैयार हुआ तो बरसात के मौसम में हजारों लोगों ने सुरक्षित नदी पार की। राजा ने शिल्पकार का सम्मान किया, लेकिन गुरु ने वह सम्मान अपने शिष्य को देते हुए कहा, “आज तुमने केवल पुल नहीं बनाया, बल्कि धैर्य, जिम्मेदारी और कर्म का महत्व भी सीख लिया।”

उस दिन के बाद शिष्य ने कभी अधूरा काम नहीं छोड़ा। उसने समझ लिया कि सफलता केवल शुरुआत करने में नहीं, बल्कि अंत तक पूरी निष्ठा से अपना दायित्व निभाने में है। कहानी से सीख मिलती है कि जीवन में अधूरा प्रयास कभी पूर्ण सफलता नहीं देता। जो व्यक्ति धैर्य, लगन और जिम्मेदारी के साथ अपने कार्य को अंत तक पूरा करता है, वही सच्ची सफलता और सम्मान प्राप्त करता है।

 

 

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