बीती यादें : बारिश की खुशनुमा शाम  

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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बारिश की हल्की-हल्की फुहारें पूरे शहर को भिगो रही थीं। खिड़की के पास खड़ी अनन्या हथेलियों पर गिरती बूंदों को महसूस कर रही थी। तभी दरवाजे की घंटी बजी। सामने आरव था, भीगा हुआ, हाथ में उसकी पसंदीदा किताब और मुस्कुराहट लिए। “सोचा, बारिश का मजा अकेले क्यों लिया जाए,” उसने मुस्कुराकर कहा। अनन्या भी मुस्कुरा दी।

दोनों ने अदरक वाली चाय बनाई और बरामदे में बैठकर बारिश देखते रहे। बातचीत किताबों से शुरू हुई, फिर सपनों, बचपन और उन बातों तक पहुंची, जो अक्सर लोग किसी खास इंसान से ही कहते हैं। शाम ढलने लगी। ठंडी हवा के झोंकों के बीच अनन्या के बाल बार-बार चेहरे पर आ रहे थे। आरव ने धीरे से उसकी ओर देखा। उनकी नजरें मिलीं और कुछ पल के लिए जैसे समय ठहर गया।

“तुम्हारे साथ हर मौसम खूबसूरत लगता है”,- आरव ने धीमे स्वर में कहा। अनन्या ने बिना कुछ कहे उसका हाथ थाम लिया। उस स्पर्श में भरोसा था, अपनापन था और वह अनकहा प्रेम था, जिसे शब्दों की जरूरत नहीं होती। बारिश अब तेज हो चुकी थी। दोनों बरामदे से बाहर निकल आए। भीगते हुए वे हंसते रहे, एक-दूसरे का हाथ थामे।

उस पल में कोई जल्दबाजी नहीं थी, सिर्फ साथ होने की खुशी थी। जैसे वर्षों से तलाशा हुआ सुकून उसे मिल गया हो। उस दिन दोनों ने महसूस किया कि प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और एक-दूसरे की भावनाओं को समझने का नाम है। पहली बारिश उनके रिश्ते की सबसे खूबसूरत याद बन गई। एक ऐसी याद, जिसमें दिलों का मिलन था और भविष्य के अनगिनत सपनों की शुरुआत।