फिल्म समीक्षा: दर्शकों को रास नहीं आई जन नेता

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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Jana Nayagan या जन नेता की कहानी एक ऐसे नायक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है और परिस्थितियां उसे एक बड़े संघर्ष की ओर ले जाती हैं। फिल्म सत्ता, भ्रष्टाचार, न्याय और व्यक्तिगत बलिदान जैसे विषयों को छूने की कोशिश करती है। हालांकि कहानी का मूल विचार दिलचस्प है, लेकिन इसकी प्रस्तुति प्रभाव छोड़ने में असफल रहती है।

फिल्म की शुरुआत कुछ दमदार एलीवेशन सीन्स के साथ होती है, जो निश्चित रूप से विजय के प्रशंसकों को पसंद आएंगे, लेकिन शुरुआती प्रभाव के बाद फिल्म अपनी पकड़ खो देती है। निर्देशक एच. विनोथ का रूपांतरण कमजोर साबित होता है, जबकि जोड़े गए अतिरिक्त सबप्लॉट पुराने, अनावश्यक और कहानी की गति को धीमा करने वाले लगते हैं। इससे मुख्य कहानी का प्रभाव भी काफी कम हो जाता है। 

तकनीकी पक्ष भी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक है। VFX, प्रोडक्शन वैल्यू और एडिटिंग उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती। कहानी कई जगह बिखरी हुई महसूस होती है, जिसके कारण भावनात्मक दृश्य दर्शकों से जुड़ने में असफल रहते हैं। जिन पलों का असर गहरा होना चाहिए था, वे भी बिना किसी प्रभाव के गुजर जाते हैं।

बॉबी देओल का विलेन किरदार पूरी तरह निराश करता है। न तो उसका चरित्र प्रभावशाली ढंग से लिखा गया है और न ही वह कभी वास्तविक खतरे का एहसास कराता है। विजय की दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और कुछ एलीवेशन मोमेंट्स के अलावा फिल्म में ऐसा बहुत कम है, जो लंबे समय तक याद रहे।

समीक्षक- प्रदीप शर्मा

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