Guru Purnima 2026: प्रभु के द्वार से होंगे गुरु के दर्शन, अयोध्या में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
On

गुरु पूर्णिमा पर रामनगरी अयोध्या में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालु, मंदिरों और आश्रमों में गुरु पूजन, सत्संग और दीक्षा का आयोजन

Guru Purnima 2026: अयोध्या में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। मणिराम दास छावनी समेत प्रमुख मंदिरों और आश्रमों में गुरु पूजन, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां श्रद्धालुओं ने गुरु दर्शन कर आशीर्वाद लिया

अयोध्या। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर रामनगरी अयोध्या श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंग गई है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच चुके हैं, जहां वे अपने गुरु के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिरों और आश्रमों में गुरु पूजन, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाए जाने वाले गुरु पूर्णिमा पर्व को अयोध्या में विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में ज्ञान और आध्यात्मिक मार्गदर्शन मिलता है।

मंदिरों और आश्रमों में विशेष आयोजन

रामनगरी के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गुरु पूर्णिमा के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मणिराम दास छावनी, राम बल्लभा कुंज, तिवारी मंदिर, चारुशिला मंदिर, राम हर्षण कुंज और दशरथ महल समेत कई मंदिरों, आश्रमों और संत पीठों पर गुरु पूजन, सत्संग, भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन हो रहा है। संतों के दरबार को आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जहां शिष्य अपने गुरु का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।

सरयू स्नान के बाद गुरु से लेते हैं दीक्षा

महंत कमल नयन दास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है। यह पर्व देशभर में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। आचार्य राघवेंद्र दास ने कहा कि अयोध्या संतों की नगरी है। हर साल लाखों श्रद्धालु सुबह सरयू नदी में स्नान करने के बाद मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं और फिर गुरु स्थानों पर पहुंचकर दीक्षा लेते हैं। दीक्षा के दौरान गुरु द्वारा दिए गए मंत्र का श्रद्धालु अपने घरों में नियमित पूजा-पाठ और साधना के समय जप करते हैं।

श्रद्धा और भक्ति से गुलजार हुई रामनगरी

गुरु पूर्णिमा के मौके पर अयोध्या में आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिरों और आश्रमों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। संतों का कहना है कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

ये भी पढ़ें : 
Guru Purnima Special: योगी सरकार संवार रही गुरुओं की तपोभूमि, पर्यटन विकास से दे रही ‘गुरु दक्षिणा’

संबंधित समाचार