Guru Purnima Special: योगी सरकार संवार रही गुरुओं की तपोभूमि, पर्यटन विकास से दे रही ‘गुरु दक्षिणा’
गुरु पूर्णिमा पर योगी सरकार का बड़ा कदम, गुरु गोरखनाथ, संत रविदास और देवरहा बाबा समेत कई संतों-ऋषियों की तपोस्थलियों का हो रहा कायाकल्प।
Guru Purnima Special: योगी सरकार उत्तर प्रदेश के संतों और ऋषियों से जुड़े तीर्थस्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर रही है। गुरु गोरखनाथ, संत रविदास और देवरहा बाबा की तपोभूमियों समेत कई आश्रमों के सौंदर्यीकरण से धार्मिक पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
लखनऊ। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश की संत, ऋषि और गुरु परंपरा से जुड़े तीर्थस्थलों के विकास को गति दी है। योगी सरकार इन ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर रही है, ताकि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके। सरकार की योजना के तहत गुरु गोरखनाथ, संत रविदास और देवरहा बाबा जैसे महान संतों की तपोस्थलियों के साथ-साथ कई ऋषि आश्रमों का सौंदर्यीकरण और पर्यटन विकास किया जा रहा है।
ऋषि आश्रमों से संत स्थलों तक विकास की पहल
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्थित श्रृंगी ऋषि, मयन ऋषि, ज्वाला ऋषि, वेदव्यास, दुर्वासा ऋषि और च्यवन ऋषि से जुड़े आश्रमों को भी पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान का पर्व है। सरकार संतों और ऋषियों की तपोभूमियों को विकसित कर प्रदेश की गौरवशाली आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने का काम कर रही है।
गोरखनाथ से रविदास धाम तक करोड़ों की परियोजनाएं
महोबा के गोरखगिरि पर्वत स्थित नाथ संप्रदाय के प्रमुख आस्था केंद्र में करीब 11.25 करोड़ रुपये की लागत से गुरु गोरखनाथ की 51 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है। वहीं, अमेठी के जायस में करीब 5.95 करोड़ रुपये की लागत से योग मुद्रा वाली 25 फीट ऊंची गुरु गोरखनाथ की कांस्य प्रतिमा का निर्माण कराया जा रहा है। वाराणसी स्थित संत रविदास जन्मस्थली के पुनर्विकास और विस्तार के लिए करीब 51.54 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा देवरिया के ब्रह्मऋषि देवरहा बाबा आश्रम के पर्यटन विकास के लिए 2.50 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम चल रहा है।
धार्मिक पर्यटन के साथ रोजगार पर भी जोर
सरकार का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थलों का विकास करना नहीं है, बल्कि इन स्थानों को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख पहचान दिलाना भी है। इससे स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। पर्यटन विभाग का मानना है कि विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास के इस प्रयास से उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान और मजबूत होगी तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
