Guru Purnima 2026: उन्नाव के गंगाघाटों पर आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी
गुरु पूर्णिमा पर भोर से ही गंगा स्नान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़। नमामि गंगे घाट पर सुरक्षा के बीच स्नान, पूजा-अर्चना, दान-दक्षिणा और भगवान सत्यनारायण की कथा में शामिल हुए श्रद्धालु।
उन्नाव/शुक्लागंज, 29 जुलाई: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर बुधवार सुबह से ही उन्नाव और शुक्लागंज के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोर होते ही दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए घाटों की ओर बढ़ने लगे। दिनभर गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला।
बंद घाटों से श्रद्धालुओं को नमामि गंगे घाट भेजा गया
सुबह के समय कुछ श्रद्धालु बंद पड़े घाटों की ओर पहुंच गए, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस ने उन्हें नमामि गंगे घाट की ओर भेजा। यहां प्रशासन की निगरानी में श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। स्नान के दौरान घाटों पर भारी भीड़ रही और पुलिस प्रशासन लगातार व्यवस्था संभालता रहा।

रेलवे स्टेशन पर भी दिनभर रही चहल-पहल
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर रेलवे स्टेशन पर भी श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। एलकेएम, रायबरेली, बालामऊ समेत विभिन्न दिशाओं से आने वाली ट्रेनों के पहुंचते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्टेशन से गंगाघाटों की ओर रवाना होते रहे। सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का आवागमन लगातार जारी रहा।
पूजा-अर्चना, दान और सत्यनारायण कथा में लिया भाग
गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मां गंगा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और घाटों पर मौजूद पंडितों को दान-दक्षिणा अर्पित की। कई श्रद्धालुओं ने भगवान सत्यनारायण की कथा भी सुनी। नगर पालिका की ओर से महिलाओं के लिए कपड़े बदलने हेतु अस्थायी स्टॉल भी लगाए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिली।
दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु
सोनिक, अचलगंज, रायबरेली, बालामऊ, लखनऊ, जैतीपुर, उन्नाव, कानपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचे। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कई लोगों ने अपने घरों में भी भगवान सत्यनारायण की कथा का आयोजन किया।
गुरु पूर्णिमा का महत्व बताया
भभूति सेवा आश्रम के भक्त चैतन्य पंडित उमेश चंद्र मिश्र ने गुरु पूर्णिमा का महत्व बताते हुए कहा कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, इसलिए इस पर्व को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि गुरु शिष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। सांसारिक गुरु जीवन के व्यवहारिक पक्ष की शिक्षा देते हैं, जबकि आध्यात्मिक गुरु आत्मज्ञान और परमात्मा की अनुभूति का मार्ग दिखाते हैं।
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