हर सिगरेट पीने वालों को क्यों नहीं होता कैंसर? कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की रिसर्च में सामने आई बड़ी वजह
'नेचर' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, धूम्रपान से होने वाले डीएनए नुकसान पर शरीर की प्रतिक्रिया व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट पर भी निर्भर करती है। हालांकि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इससे धूम्रपान के खतरे कम नहीं हो जाते।
नई दिल्ली: धूम्रपान को फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन हर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को कैंसर नहीं होता। दूसरी ओर, कुछ ऐसे लोग भी इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी। अब इस सवाल पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च ने अहम जानकारी दी है।
प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, किसी व्यक्ति की आनुवंशिक बनावट (Genetic Makeup) यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि धूम्रपान, तेज धूप या अन्य हानिकारक तत्वों से डीएनए को हुए नुकसान से शरीर किस तरह मुकाबला करेगा।
जेनेटिक्स से प्रभावित होता है कैंसर का जोखिम
शोधकर्ताओं के मुताबिक, समान जोखिम के बावजूद हर व्यक्ति में कैंसर विकसित होने की संभावना एक जैसी नहीं होती। इसका कारण प्रत्येक व्यक्ति की अलग-अलग आनुवंशिक संरचना है, जो डीएनए में होने वाले बदलावों और शरीर की मरम्मत प्रक्रिया को प्रभावित करती है।
अध्ययन के वरिष्ठ लेखक ने कहा कि कैंसर केवल संयोग का परिणाम नहीं है। अलग-अलग लोगों में ट्यूमर बनने की प्रक्रिया उनकी आनुवंशिक विशेषताओं से काफी हद तक प्रभावित होती है।
चूहों पर किया गया नियंत्रित अध्ययन
इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने अलग-अलग आनुवंशिक विशेषताओं वाले चूहों को नियंत्रित वातावरण में रखा। सभी को समान उम्र में कैंसर पैदा करने वाले रसायन डायथाइलनाइट्रोसामाइन (DEN) की बराबर मात्रा दी गई।
इसके बाद लगभग 600 ट्यूमर के जीनोम का विश्लेषण किया गया। जांच में पाया गया कि सभी चूहों में कैंसर बनने की प्रक्रिया समान नहीं थी। अलग-अलग जेनेटिक बनावट के कारण डीएनए में बदलाव और ट्यूमर के विकसित होने का तरीका भी अलग-अलग रहा।
प्रिसिजन मेडिसिन को मिल सकती है नई दिशा
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से भविष्य में प्रिसिजन मेडिसिन (Precision Medicine) को बढ़ावा मिलेगा। यानी भविष्य में किसी मरीज के इलाज और कैंसर के जोखिम का आकलन उसकी आनुवंशिक प्रोफाइल के आधार पर अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा।
इससे केवल धूम्रपान का इतिहास ही नहीं, बल्कि व्यक्ति की जेनेटिक पृष्ठभूमि भी कैंसर के खतरे का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
धूम्रपान अब भी सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस शोध का अर्थ यह नहीं है कि धूम्रपान सुरक्षित है। तंबाकू आज भी फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा और रोका जा सकने वाला कारण माना जाता है। कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से जोखिम कम हो सकता है, लेकिन इससे धूम्रपान से होने वाले नुकसान पूरी तरह समाप्त नहीं होते।
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