Rampur News : गुरु पूर्णिमा पर ढकुरिया घाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, महर्षि वेदव्यास को किया नमन

Amrit Vichar Network
Edited By Pradeep Kumar
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रामपुर में गुरु पूर्णिमा पर उमड़ी आस्था, ढकुरिया घाट पर गंगा स्नान के लिए जुटे श्रद्धालु

गुरु पूर्णिमा पर रामपुर के ढकुरिया घाट में हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। वहीं मछुआ समाज ने महर्षि वेदव्यास जी को नमन किया। मौके पर भारी पुलिस बल मुस्तैद रहा।

रामपुर, अमृत विचार। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जिले में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। शाहबाद क्षेत्र के ढकुरिया घाट पर सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गंगा में डुबकी लगाई और पुण्य लाभ अर्जित किया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा व सम्मान व्यक्त करते हुए सुख-समृद्धि की कामना की।

घाट पर रही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
गंगा स्नान के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। क्षेत्राधिकारी (CO) देवकीनंदन स्वयं पुलिस बल के साथ मौके पर मुस्तैद रहे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। पुलिसकर्मियों ने घाट पर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी। प्रशासन की सतर्कता के चलते स्नान कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। पूरे दिन घाट पर धार्मिक माहौल बना रहा।

मछुआ समाज ने महर्षि वेदव्यास को किया नमन
वहीं, दूसरी ओर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मछुआ तुरैहा समाज संगठन के तत्वावधान में चौकी हजियानी स्थित जिला मुख्यालय कार्यालय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान समाज के मार्गदर्शक व गुरु महर्षि वेदव्यास जी के चित्र पर सभी स्वजातीय परिवारों और संगठन पदाधिकारियों ने पुष्प अर्पित कर मंगलकामना की।

'गुरु के बिना नहीं मिलता ज्ञान व सुमार्ग'
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष कमल कुमार तुरैहा ने कहा कि महर्षि वेदव्यास जी ने ही महाभारत महाकाव्य की रचना की थी। उन्होंने वेदों का विभाजन कर उन्हें सरल बनाया, जिससे आम जनमानस भी ज्ञान प्राप्त कर सके।

उन्होंने बताया कि गुरु के बिना न तो ज्ञान प्राप्त होता है और न ही सुमार्ग मिलता है। गुरु एक चेतना और मार्गदर्शक हैं, जो सत्य का आभास कराते हैं और ईश्वर से जोड़ते हैं। इसलिए भारतीय संस्कृति में माता-पिता के बाद गुरु का सर्वोच्च स्थान माना जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मछुआ समाज में महर्षि वेदव्यास जी का सर्वोच्च और पूजनीय स्थान है।

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