सहारनपुर मीट प्लांट में अमोनिया गैस रिसाव की उच्चस्तरीय जांच शुरू, 14 महिला श्रमिक हुई थीं प्रभावित
डीएम के निर्देश पर गठित टीम ने खंगाले सुरक्षा मानक, जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के गागलहेड़ी थाना क्षेत्र स्थित हरोड़ा गांव में एएलएम मीट प्लांट में अमोनिया गैस रिसाव की घटना के बाद जिला प्रशासन ने उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान के निर्देश पर गठित संयुक्त जांच टीम ने बुधवार को पूरे दिन प्लांट में पहुंचकर सुरक्षा मानकों और घटना की परिस्थितियों की जांच की।
जानकारी के अनुसार, पूर्व सांसद एवं समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता फजलुर्रहमान कुरैशी के स्वामित्व वाले एएलएम मीट प्लांट में मंगलवार को कूलिंग सिस्टम की पाइपलाइन के जोड़ से अमोनिया गैस का रिसाव हो गया था। घटना के समय पैकेजिंग यूनिट में काम कर रहीं महिला श्रमिकों को आंखों में जलन, आंसू आना, चक्कर और उल्टी जैसी शिकायतें हुई थीं। इसके बाद उन्हें तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
तकनीकी खराबी से हुआ रिसाव, 12 श्रमिक अस्पताल से डिस्चार्ज
प्लांट प्रबंधन के अनुसार, गैस रिसाव की जानकारी मिलते ही तकनीकी कर्मचारियों ने करीब 15 से 20 मिनट के भीतर क्षतिग्रस्त पाइप जोड़ की वेल्डिंग कर रिसाव पर नियंत्रण पा लिया था। प्रबंधन ने इसे एक सीमित तकनीकी घटना बताते हुए कहा कि सभी सुरक्षा उपाय तत्काल लागू किए गए। घटना से प्रभावित 14 महिला श्रमिकों में से 12 को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि दो महिलाओं का इलाज अभी जारी है।
कई विभागों के अधिकारी जांच टीम में शामिल
जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति का नेतृत्व सदर उपजिलाधिकारी सुबोध कुमार कर रहे हैं। टीम में फैक्टरी विभाग के अतिरिक्त निदेशक रवि प्रकाश, श्रम अधिकारी शैलेंद्र शिवम त्रिपाठी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. योगेंद्र कुमार, मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रताप सिंह और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मदनपाल सिंह गौड़ सहित कई विभागों के अधिकारी शामिल हैं। जांच टीम प्लांट में सुरक्षा व्यवस्था, गैस रिसाव के कारणों और औद्योगिक मानकों के पालन की जांच कर रही है। रिपोर्ट जल्द जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।
एफआईआर दर्ज नहीं, लाइसेंस की भी जांच
गागलहेड़ी थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि घटना के संबंध में अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। वहीं, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने जांच के दौरान बताया कि मीट प्लांट के पास प्रतिदिन 600 पशुओं के वध की स्वीकृत क्षमता का वैध लाइसेंस मौजूद है। प्लांट प्रबंधक डॉ. आजम ने बताया कि गैस रिसाव की सूचना मिलते ही संयंत्र को सुरक्षित कर सभी कर्मचारियों को बाहर निकाल लिया गया था।
उन्होंने दावा किया कि फैक्टरी में औद्योगिक सुरक्षा के सभी जरूरी इंतजाम उपलब्ध हैं और प्रभावित कर्मचारियों के परिजनों को भी समय पर सूचना दे दी गई थी। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद गैस रिसाव के वास्तविक कारणों, सुरक्षा मानकों के अनुपालन और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
