UP Education News: सरकारी स्कूलों पर नहीं लगेगा ताला, छात्रों की संख्या के आधार पर होगी व्यवस्था
बेसिक शिक्षा विभाग का स्पष्टीकरण, रिक्त भवनों में संचालित होंगी बाल वाटिकाएं
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में किसी भी परिषदीय (सरकारी) विद्यालय को बंद नहीं किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का निकटवर्ती स्कूलों से पेयरिंग किया जा रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल, पर्याप्त शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। इस प्रक्रिया से रिक्त हुए भवनों में अब प्री-प्राइमरी कक्षाओं और बाल वाटिकाओं का संचालन किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 1.32 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालय संचालित हैं और किसी भी स्कूल को बंद नहीं किया गया है। बल्कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग और बच्चों के हित में विद्यालयों का समायोजन किया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए हैं। शिक्षा का बजट करीब 28 हजार करोड़ रूपए से बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रूपए से अधिक हो गया है। वहीं सरकारी विद्यालयों में नामांकन 1.34 करोड़ से बढ़कर लगभग 1.90 करोड़ तक पहुंच गया है। इसी अवधि में ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से घटकर केवल तीन प्रतिशत रह गई है।
सरकार के अनुसार ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में 19 आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष काम किया गया है। वर्ष 2017 में इन मानकों पर प्रगति 36 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 97 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं और शैक्षणिक वातावरण बेहतर हुआ है। विभाग का कहना है कि रिक्त भवनों में बाल वाटिकाओं का संचालन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत करेगा।
