Jamarani Dam Project: 2026-27 के लक्ष्य से पीछे चल रहा जमरानी बांध प्रोजेक्ट, सीडीओ ने तेज काम के दिए निर्देश

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Edited By Anjali Singh
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हल्द्वानी में परियोजना की समीक्षा के दौरान सामने आईं खामियां, मलबा निस्तारण, पुनर्वास और निर्माण गुणवत्ता पर जताई नाराजगी

जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना की समीक्षा में निर्माण कार्य धीमा मिला। सीडीओ ने मलबा निस्तारण, पुनर्वास और गुणवत्ता सुधार के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए।

हल्द्वानी। बहुप्रतीक्षित जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना की रफ्तार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नैनीताल के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) अरविंद कुमार पांडे ने बुधवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण किया तो निर्माण कार्यों में कई खामियां सामने आईं। उन्होंने अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को संसाधन बढ़ाकर तय समय में काम पूरा करने के निर्देश दिए। सीडीओ ने निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य की धीमी प्रगति, मलबा निस्तारण, पुनर्वास, गुणवत्ता नियंत्रण और सामाजिक दायित्व से जुड़े मामलों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि परियोजना वर्ष 2026-27 के निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले पीछे चल रही है, इसलिए कार्यों में तेजी लाने की जरूरत है।

मलबा निस्तारण व्यवस्था पर उठे सवाल

निरीक्षण में सामने आया कि मलबा निस्तारण के लिए तीन डंपिंग साइट चिन्हित की गई हैं, लेकिन फिलहाल केवल एक साइट का ही उपयोग किया जा रहा है। इस साइट पर भी वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से मलबा निस्तारण नहीं होने की बात सामने आई। सीडीओ ने बताया कि नदी किनारे डाला गया मलबा बारिश के दौरान नदी में बह रहा है, जो पर्यावरण के लिहाज से गंभीर मामला है। उन्होंने सभी डंपिंग साइटों को जल्द विकसित कर पर्यावरणीय मानकों के अनुसार मलबा निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

408 करोड़ रुपये के पुनर्वास पैकेज की समीक्षा

जमरानी परियोजना के तहत पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R&R) नीति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित परिवारों को करीब 408 करोड़ रुपये के मुआवजे का प्रावधान है। अब तक अधिकांश मुआवजा वितरित किया जा चुका है, जबकि करीब 68 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बाकी है। वहीं, लगभग 12 करोड़ रुपये से जुड़े 14 परिवारों के मामले मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) में लंबित हैं। सीडीओ ने इन मामलों का जल्द निस्तारण कर प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के निर्देश दिए।

थर्ड पार्टी जांच एजेंसी के निरीक्षण पर नाराजगी

परियोजना की निर्माण गुणवत्ता की निगरानी के लिए नियुक्त थर्ड पार्टी एजेंसी पिछले चार-पांच महीनों से साइट निरीक्षण नहीं कर रही थी। जबकि नियमों के अनुसार हर तीन महीने में निरीक्षण किया जाना जरूरी है। इस पर सीडीओ ने नाराजगी जताते हुए नियमित निरीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

मैनपावर और मशीनरी बढ़ाने के निर्देश

समीक्षा में यह भी सामने आया कि परियोजना स्थल पर आवश्यक क्षमता के अनुसार मैनपावर और मशीनरी उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सीडीओ ने अधिकारियों को संसाधन बढ़ाकर निर्माण कार्यों में तेजी लाने और निर्धारित समय सीमा में लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए।

विस्थापित परिवारों और सामाजिक योजनाओं की भी समीक्षा

बैठक में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए प्राग फार्म में विकसित की जा रही कॉलोनी की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को सभी जरूरी व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा कॉरपोरेट पर्यावरणीय जिम्मेदारी (CSR) के तहत प्रभावित क्षेत्र के 19 गांवों में 13 करोड़ रुपये की लागत से 1,175 सोलर लाइटें लगाने की योजना की समीक्षा की गई। सीडीओ ने सोलर लाइट स्थापना कार्य जिला प्रशासन की निगरानी में कराने के निर्देश दिए। सामाजिक दायित्व के तहत शिक्षा, शौचालय, स्मार्ट क्लास समेत अन्य विकास कार्यों के लिए निर्धारित 13 करोड़ रुपये (पांच वर्ष) की राशि में अब तक केवल 40 लाख रुपये खर्च होने पर भी सीडीओ ने नाराजगी जताई। उन्होंने प्रभावित गांवों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार कर विकास कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने को कहा। निरीक्षण के दौरान परियोजना प्रबंधक ललित कुमार, हिमांशु पंत समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, परियोजना के महाप्रबंधक के मौके पर उपस्थित नहीं होने पर सीडीओ ने नाराजगी व्यक्त की।

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