Barabanki News: रसूलपुर हेतम में 50 साल पुराने रास्ते पर अवैध कब्ज़ा, CM से शिकायत के बाद भी सात परिवार घरों में कैद 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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-अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने डीएम-एसपी को दिए थे तत्काल समाधान के निर्देश, फिर भी नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई

बाराबंकी, अमृत विचार। तहसील फतेहपुर अंतर्गत देवा थाना क्षेत्र की विशुनपुर चौकी के ग्राम रसूलपुर हेतम में करीब 50 वर्ष पुराने आवागमन के रास्ते पर कथित अवैध कब्जे का मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचने के बाद अपर मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने जिलाधिकारी बाराबंकी और पुलिस अधीक्षक बाराबंकी को तत्काल समस्या के समाधान के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद पीड़ित परिवारों का आरोप है कि आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और रास्ता अब भी अवरुद्ध पड़ा है।

गांव के अर्जुना, सुनीता, रानी सोनी, राजकुमारी, कुसुम, मनोज कुमार जायसवाल और सहजराम सहित सात पीड़ित परिवारों ने मुख्यमंत्री को भेजे प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि रामखेलावन पुत्र मैकू लाल, कमलेश चंद्र पुत्र मैकू लाल तथा विमलेश पुत्र मैकू लाल ने गाटा संख्या-188 में दर्ज लगभग 13 फीट चौड़े पुराने सार्वजनिक रास्ते पर कथित रूप से कब्जा कर 25 मई 2026 को पक्का निर्माण करा लिया। 

उनके घरों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। पीड़ितों का कहना है कि यह रास्ता पिछले करीब 50 वर्षों से ग्रामीणों के आवागमन में उपयोग होता रहा है। रास्ता बंद होने से सातों परिवारों के सामने घरों से निकलने तक का संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि इस मामले में कुछ राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से कब्जा कराया गया, जिसके कारण अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी।

पीड़ित परिवारों के अनुसार उन्होंने इस संबंध में उपजिलाधिकारी फतेहपुर, जिलाधिकारी बाराबंकी, बाराबंकी के सांसद, कुर्सी विधायक सहित कई अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। इसके बाद मामला मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचा, जहां से अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तत्काल कार्रवाई कर समस्या का समाधान कराने के निर्देश जारी किए। 

पीड़ितों का आरोप है कि मुख्यमंत्री कार्यालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मौके पर न तो कब्जा हटाया गया और न ही रास्ता बहाल कराया गया। आज भी रास्ता बंद होने के कारण सातों परिवार वैकल्पिक मार्ग तलाशने को मजबूर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशों का भी समय पर पालन नहीं हो रहा है, तो आम नागरिकों को न्याय कैसे मिलेगा।

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