मानसून सत्र में आज गूंजेगा पत्रकारों की पेंशन का मुद्दा, सदन में आवाज उठाएंगी आराधना मिश्रा ‘मोना’

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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रामपुर खास की कांग्रेस विधायक ने वयोवृद्ध पत्रकारों की आर्थिक स्थिति का उठाया मुद्दा, कहा- सरकार ने दो बार कागजात लिए लेकिन पेंशन योजना अब तक लागू नहीं हुई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को पत्रकारों की पेंशन का मुद्दा सदन में उठाया जाएगा। प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक एवं उत्तर प्रदेश विधान मंडल में कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ वयोवृद्ध पत्रकारों को पेंशन दिए जाने की मांग को सदन में रखेंगी।

विधायक की ओर से सदन में सरकार का ध्यान पत्रकारों की आर्थिक स्थिति की ओर आकर्षित किया जाएगा। उनका कहना है कि पत्रकार समाज को सूचना और जागरूकता देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन लंबे समय तक पत्रकारिता करने के बाद उम्रदराज पत्रकारों के सामने आर्थिक कठिनाइयां खड़ी हो जाती हैं।

दो बार जमा कराए गए दस्तावेज, फिर भी योजना का इंतजार

आराधना मिश्रा ‘मोना’ के मुताबिक मौजूदा सरकार की ओर से वयोवृद्ध पत्रकारों को पेंशन दिए जाने के संबंध में दो बार कागजात जमा करवाए गए हैं। इसके बावजूद अभी तक पेंशन व्यवस्था को लागू नहीं किया गया है।

उन्होंने सरकार से इस मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। विधायक का कहना है कि उम्रदराज पत्रकार आर्थिक परेशानियों के बीच सरकार की ओर उम्मीद से देख रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

कई राज्यों में पत्रकारों को मिल रही मासिक पेंशन

विधायक ने अपने प्रस्ताव में उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में पत्रकारों को दी जा रही पेंशन का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार बिहार में पत्रकारों को 15 हजार रुपये, हरियाणा में 10 हजार रुपये, तमिलनाडु में 15 हजार रुपये, गोवा में 7,500 रुपये, असम में 8 हजार रुपये, त्रिपुरा में 10 हजार रुपये, उत्तराखंड में 8 हजार रुपये और पुडुचेरी में 6 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जा रही है।

26 अगस्त 2022 को जारी हुआ था पत्र

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 26 अगस्त 2022 को सभी सूचना अधिकारियों को इस संबंध में पत्र भी जारी किए गए थे। हालांकि, उनके मुताबिक इसके बावजूद अब तक इस मामले में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वयोवृद्ध पत्रकारों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पत्रकार पेंशन के इस महत्वपूर्ण मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और पेंशन व्यवस्था को तत्काल लागू किया जाए।

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