लखनऊ का सेंट मैरी अस्पताल पुलिस के रडार पर, नवजातों की खरीद-फरोख्त नेटवर्क की जांच तेज

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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जन्मे बच्चों के माता-पिता से संपर्क करेगी पुलिस, दस्तावेज की होगी फॉरेंसिक जांच

बीते दो साल के प्रसव का रिकॉर्ड तलब, अस्पताल के जन्म-डिस्चार्ज दस्तावेज और CCTV फुटेज की होगी जांच; जरूरत पड़ने पर मां और नवजात का DNA टेस्ट भी कराया जाएगा

लखनऊ, अमृत विचार: कुर्सी रोड पर सेंट मैरी अस्पताल में जाली मेडिकल पेपर तैयार कर नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त के मामले में अब क्राइम ब्रांच भी एक्टिव हो गयी है। क्राइम ब्रांच इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति, अस्पताल कर्मी या किसी संगठित नेटवर्क की संलिप्तता है। पुलिस ने सेंट मैरी अस्पताल प्रबंधन से पिछले दो वर्ष में हुए प्रसव का डेटा मांगा है। माना जा रहा है कि उक्त दस्तावेजों के मिलने के बाद क्राइम ब्रांच, एएचटीयू व गुडंबा पुलिस बच्चों के माता-पिता से संपर्क कर साक्ष्य लेगी। वहीं, ताजा मामले में पुलिस अस्पताल के मूल अभिलेख, जन्म एवं डिस्चार्ज रिकॉर्ड तथा डिजिटल डेटा का परीक्षण कर रही है। साक्ष्य मिलने पर संचालक डॉ. विनोद और उनकी पत्नी डा. शालू के खिलाफ और कार्रवाई करेगी। अस्पताल के दस्तावेजों की पुलिस फॉरेंसिक जांच भी कराएगी।

एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि जांच में अगर जरूरत पड़ेगी तो नवजात शिशु, उसकी मां आरती और कथित मां रेनू शर्मा का डीएनए टेस्ट कराकर जैविक मातृत्व एवं बच्चे की वास्तविक पहचान का वैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। एडीसीपी का कहना कि मामले की विवेचना सिर्फ मौखिक बयान में सीमित न रहकर वैज्ञानिक एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। संबंधित चिकित्सकों, अस्पताल प्रबंधन एवं कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। अस्पताल प्रबंधन से सभी सीसीटीवी कैमरों का रिकार्ड मांगा गया है। एडीसीपी ने बताया कि दोनों आरोपी आरती और रेनू शर्मा निवासी शांति विहार गुडंबा का मेडिकल कराया गया है । नवजात बच्चे को प्राग नारायण रोड हजरतगंज स्थित बाल शिशु गृह में रखा गया है। आरोपी रेनू शर्मा गृहणी व आरती देवी मजदूरी करती हैं ।

30 जुलाई को आरती ने दिया था बच्चे को जन्म

इंस्पेक्टर अंजनी कुमार मिश्रा ने बताया कि कुर्सी रोड बहादुरपुर निवासी आरती ने 30 जुलाई को बच्चे को सेंट मैरी पॉलीक्लिनिक में जन्म दिया था। अस्पताल के डॉक्टर विनोद और उनकी पत्नी डॉ. शालू ने फर्जी दस्तावेज बनवाकर बच्चे की मां की जगह रेनू का नाम दर्ज कर दिया। चाइल्ड लाइन, एएचटीयू और पुलिस टीम ने जब छापेमारी कर दस्तावेज जब्त किए तब इसका खुलासा हुआ। मामले में डॉ. शालू, डॉ. विनोद, रेनू और आरती के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गयी थी। जांच के दौरान रेनू शर्मा के पास से नवजात शिशु प्राप्त हुआ । पूछताछ में रेनू शर्मा ने स्वीकार किया कि उक्त शिशु उसका जैविक बच्चा नहीं है। आरती देवी से पूछताछ की गई, जिसमें उसने बताया कि उसके पूर्व से तीन बच्चे हैं। संतान न होने के कारण उसने अपना नवजात शिशु रेनू शर्मा को सौंप दिया । जांच में यह भी प्रकाश में आया कि अस्पताल में वास्तविक प्रसूता के स्थान पर अन्य महिला के नाम से प्रसव संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए थे। उक्त तथ्यों की निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक विवेचना की जा रही है ।

जनसामान्य से पुलिस की अपील

एडीसीपी किरन यादव ने आमजन से अपील की है। उन्होंने बताया कि कोई दंपत्ति किसी बच्चे को गोद लेना चाहता है, तो वह केवल किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 एवं केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (सीएआरए) द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से ही दत्तक ग्रहण करें। किसी भी निजी समझौते, फर्जी दस्तावेज, अस्पताल, नर्सिंग होम अथवा बिचौलिये के माध्यम से बच्चे का हस्तांतरण कानूनन अपराध है। किसी अस्पताल, नर्सिंग होम, बिचौलिये या अन्य किसी व्यक्ति द्वारा नवजात अथवा किसी भी बच्चे के अवैध हस्तांतरण, अवैध दत्तक ग्रहण, फर्जी अभिलेख तैयार करने अथवा मानव तस्करी जानकारी प्राप्त हो, तो इसकी सूचना संबंधित थाना, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के नंबर 7839861034 पर दें।

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