हिंदू नेताओं की हत्या की साजिश रचने का मामला: आरोपियों के ट्रायल में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, मांगी रिपोर्ट

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Edited By Virendra Pandey
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हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हिंदू धार्मिक नेताओं की हत्या की साजिश रचने और देश में भय व आतंक पैदा करने के आरोपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो कथित सदस्यों के खिलाफ चल रहे यूएपीए मामले के ट्रायल में हो रही देरी पर सख्त नाराजगी जताई है। न्यायालय ने विशेष कोर्ट, एनआईए, लखनऊ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। न्यायालय ने कहा है कि बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद मुकदमे की सुनवाई में अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं हुई।

लखनऊ,अमृत विचार : हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने हिंदू धार्मिक नेताओं की हत्या की साजिश रचने और देश में भय व आतंक पैदा करने के आरोपी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो कथित सदस्यों के खिलाफ चल रहे यूएपीए मामले के ट्रायल में हो रही देरी पर सख्त नाराजगी जताई है। न्यायालय ने विशेष कोर्ट, एनआईए, लखनऊ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। न्यायालय ने कहा है कि बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद मुकदमे की सुनवाई में अपेक्षित प्रगति क्यों नहीं हुई।

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने यह आदेश पीएफआई के कथित सदस्यों अंसद बदरुद्दीन और फिरोज की आपराधिक अपील पर पारित किया। न्यायालय ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के अनुपालन में तत्परता नहीं दिखाई। आगे कहा कि ट्रायल में उल्लेखनीय प्रगति न होने की स्थिति में अभियुक्तों के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के मौलिक अधिकार की रक्षा का प्रश्न उठता है। 

अभियोजन के अनुसार, जानकारी मिली थी कि पीएफआई के सदस्य हिंदू धार्मिक संगठनों के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की हत्या की साजिश रच रहे हैं तथा समाज में भय और आतंक पैदा करने के लिए हिंदू धर्म के विभिन्न कार्यक्रमों में विस्फोट करने की भी उनकी योजना है। दोनों अभियुक्तों को 16 फरवरी 2021 को एटीएस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय उनके पास से एक पिस्तौल, 6 जिंदा कारतूस, विस्फोटकों की 9 छड़ें, बैटरी के साथ 2 विस्फोटक, ईआर-एफओ उपकरण आदि तथा मलयालम भाषा में लिखी एक डायरी भी बरामद किए जाने की बात कही गई है। न्यायालय ने पाया कि हाईकोर्ट ने 7 दिसंबर 2022 को ही ट्रायल कोर्ट को मुकदमे की सुनवाई तेजी से पूरी करने और संभव हो तो एक वर्ष के भीतर निर्णीत करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद जनवरी 2024 में भी कोर्ट ने निर्देश दिया था कि किसी गवाह की मुख्य परीक्षा पूरी होने के बाद उसकी जिरह तत्काल कराई जाए और सभी गवाहों की मुख्य परीक्षा पूरी होने तक जिरह लंबित न रखी जाए। दोनों आदेशों के बावजूद सुनवाई पूरी न होने पर अभियुक्तों ने पुनः जमानत याचिका दाखिल की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अभियोजन के कुल 18 गवाह हैं,  लेकिन अभियोजन गवाह संख्या 2 की जिरह अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इस पर न्यायालय ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 को होगी।

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