बंटवारे की त्रासदी और इंसानियत की कहानी लेकर आ रही ‘बंटवारा 1947’
भारत के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय माने जाने वाले विभाजन की त्रासदी को बड़े पर्दे पर एक बार फिर जीवंत करने के लिए फिल्म ‘बंटवारा 1947’ तैयार है। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी यह ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म आजादी, विस्थापन, सांप्रदायिक तनाव और इंसानियत के बीच संघर्ष की कहानी कहती है। फिल्म 14 अगस्त को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है।
रिलीज से पहले फिल्म के कलाकार प्रचार अभियान में जुटे हैं। इसी सिलसिले में अभिनेता सनी देओल और अभिनेत्री प्रीति जिंटा 7 अगस्त को लखनऊ पहुंचे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान सनी देओल के बेटे और अभिनेता करण देओल भी मौजूद रहे। मुलाकात की तस्वीरें दोनों पक्षों ने सोशल मीडिया पर साझा कीं।
फिल्म में सनी देओल और प्रीति जिंटा एक शादीशुदा दंपती की भूमिका निभा रहे हैं। कहानी उस दौर से शुरू होती है, जब देश आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन इसी बीच सांप्रदायिक हिंसा की आग फैलने लगती है। देखते ही देखते लाखों लोगों की तरह फिल्म के मुख्य किरदार का परिवार भी हिंसा और विस्थापन की चपेट में आ जाता है।
सीमा पार करने के बाद परिवार को एक ऐसी हवेली मिलती है, जहां पहले से एक बुजुर्ग हिंदू महिला रह रही है। यह किरदार शबाना आजमी निभा रही हैं। वह अपना घर छोड़ने से इनकार करती हैं। इसके बाद कहानी सिर्फ एक परिवार के संघर्ष तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धार्मिक नफरत के बीच इंसानियत की तलाश बन जाती है। सनी देओल का किरदार उस बुजुर्ग महिला की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाता है और सांप्रदायिक हिंसा का विरोध करता है। फिल्म के ट्रेलर में कई संवाद सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सह-अस्तित्व का संदेश देते नजर आते हैं। फिल्म यह सवाल भी उठाती है कि धर्म की पहचान से पहले इंसान होना क्यों जरूरी है और क्या विभाजन की रेखा दिलों को भी बांट सकती है?
करण देओल भी फिल्म में अहम भूमिका में नजर आएंगे और सनी देओल के ऑन-स्क्रीन बेटे का किरदार निभा रहे हैं। लगभग तीन दशक बाद राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी एक बार फिर साथ आई है। फिल्म का संगीत एआर रहमान ने तैयार किया है, जबकि गीतों के बोल जावेद अख्तर ने लिखे हैं। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले आमिर खान और अपर्णा पुरोहित निर्मित यह फिल्म विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी को मानवीय नजरिए से सामने रखने की कोशिश करती है।
