फिल्म समीक्षा : ऑपरेशन सफेद सागर, कारगिल की जंग
कारगिल युद्ध पर आधारित नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ युद्ध को केवल गोलियों और बमों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि रणनीति, कूटनीति और सैनिकों के भावनात्मक संघर्ष को भी सामने लाती है। सीरीज के शो रनर और पूर्व वायुसेना अधिकारी कुशल श्रीवास्तव हैं, जिससे सैन्य अभियानों की प्रस्तुति में वास्तविकता का पुट दिखाई देता है। कहानी 1990 के दशक के उत्तरार्ध से शुरू होती है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता के साथ परमाणु तनाव भी मौजूद था। इसके बाद सीरीज कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ और उससे शुरू हुए युद्ध की ओर बढ़ती है।
राजनीतिक घटनाक्रम और सैन्य फैसलों को भी कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। विनय पाठक ने नवाज शरीफ और मनु ऋषि चड्ढा ने परवेज मुशर्रफ की भूमिका में प्रभाव छोड़ा है। भारतीय पक्ष में सिद्धार्थ स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा और जिमी शेरगिल बीएस धनोआ की भूमिका में नजर आते हैं। दोनों कलाकार सैनिकों के तनाव और जज्बे को प्रभावी ढंग से सामने लाते हैं।
सीरीज की सबसे बड़ी ताकत इसके हवाई युद्ध के दृश्य हैं। इन्हें अनावश्यक रूप से ग्लैमराइज करने के बजाय तकनीकी बारीकियों, टीमवर्क और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में अभियानों की चुनौतियों पर ध्यान दिया गया है। जहां लक्ष्य ने कारगिल युद्ध को जमीन से देखा था, वहीं ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ उसी संघर्ष को आसमान से देखने का अवसर देती है। गंभीर विषय, प्रभावी अभिनय और संयमित प्रस्तुति इसे युद्ध आधारित सीरीज पसंद करने वालों के लिए देखने लायक बनाती है।
-समीक्षक- नरीज
