कैंपस का पहला दिन : आत्मविश्वास की नई उड़ान
जीवन में कुछ दिन ऐसे होते हैं, जो समय बीत जाने के बाद भी स्मृतियों में वैसे ही ताजा बने रहते हैं। मेरे लिए बीएससी की छात्रा के रूप में कॉलेज का पहला दिन भी ऐसा ही एक अविस्मरणीय अनुभव था। स्कूल की सीमित दुनिया से निकलकर कॉलेज के विशाल और स्वतंत्र वातावरण में कदम रखना मेरे जीवन का एक नया अध्याय था। मन में उत्साह भी था, जिज्ञासा भी और हल्की-सी घबराहट भी।
सुबह जब मैं कॉलेज के मुख्य द्वार पर पहुंची, तो उसकी भव्य इमारत, हरे-भरे परिसर और विद्यार्थियों की चहल-पहल देखकर मन रोमांचित हो उठा। ऐसा लग रहा था मानो मैं अपने सपनों की दुनिया में प्रवेश कर रही हूं। चारों ओर नए चेहरे थे। कोई अपने दोस्तों के साथ हंस-बोल रहा था, तो कोई मेरी ही तरह संकोच में इधर-उधर देख रहा था। मैं भी अपने मन की धड़कनों को संभालते हुए प्रवेश द्वार से भीतर चली गई।
कुछ ही देर में परिचय सत्र शुरू हुआ। हमारी कक्षा में आए अध्यापकों ने मुस्कुराते हुए हमारा स्वागत किया और कॉलेज के नियमों, पढ़ाई के तरीके तथा अनुशासन के बारे में विस्तार से बताया। स्कूल की तरह यहां हर बात पर निगरानी नहीं थी, बल्कि स्वयं जिम्मेदार बनकर सीखने की प्रेरणा दी जा रही थी। तभी मुझे पहली बार महसूस हुआ कि कॉलेज केवल डिग्री हासिल करने का स्थान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व को संवारने की एक कार्यशाला भी है।
मेरी बगल में बैठी एक छात्रा से बातचीत शुरू हुई। कुछ ही मिनटों में औपचारिक परिचय सहज मित्रता में बदलने लगा। हम दोनों ने अपनी पढ़ाई, रुचियों और भविष्य के सपनों के बारे में बातें कीं। उस दिन बने कुछ परिचय आगे चलकर जीवनभर की यादगार दोस्ती में बदल गए। आज भी उन शुरुआती मुलाकातों को याद करती हूं तो चेहरे पर अनायास मुस्कान आ जाती है।
पहली बार विज्ञान प्रयोगशाला देखने का अनुभव भी बेहद रोमांचक था। चमचमाते उपकरण, रसायनों की शीशियां और व्यवस्थित प्रयोगशाला देखकर मन में वैज्ञानिक बनने के सपने और मजबूत हो गए। ऐसा लगा कि अब किताबों में पढ़े गए सिद्धांतों को अपनी आंखों के सामने सच होते देखने का अवसर मिलेगा। उस क्षण पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं, बल्कि ज्ञान की खोज का सुंदर सफर प्रतीत हुई।
दिनभर की हलचल के बाद जब मैं घर लौटी, तो मन में एक अलग ही आत्मविश्वास था। सुबह जो घबराहट थी, उसकी जगह अब नई उम्मीदों और उत्साह ने ले ली थी। मुझे महसूस हुआ कि जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव शुरू हो चुका है, जहां हर दिन कुछ नया सीखने, स्वयं को पहचानने और अपने सपनों को आकार देने का अवसर मिलेगा। आज मैं बीएससी के छठे सेमेस्टर में हूं। छात्रा के रूप में कॉलेज का वह पहला दिन याद आता है तो मन उसी उत्साह से भर उठता है। वह दिन केवल एक नई कक्षा की शुरुआत नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और नए सपनों की ओर बढ़ाया गया पहला सशक्त कदम था।
रितिका सिंह, छात्रा बीएससी, एसएस विश्वविद्यालय, शाहजहांपुर
