बोध कथा : सबसे बड़ा सुख 

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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एक गांव में माधव नाम का किसान रहता था। उसके पास केवल पांच बीघा जमीन थी। वह मेहनती, ईमानदार और संतोषी स्वभाव का था। उसकी पत्नी और दो बच्चे भी खेत के काम में उसका हाथ बंटाते थे। फसल चाहे कम हो या अधिक, माधव हमेशा भगवान का धन्यवाद करता और जरूरतमंदों की सहायता करना नहीं भूलता। उसी गांव में सेठ धनपाल रहता था। उसके पास सैकड़ों बीघा जमीन, कई गोदाम और अपार धन-संपत्ति थी। फिर भी वह हमेशा चिंतित रहता। उसे डर लगा रहता कि कहीं उसका धन कम न हो जाए या कोई उसे धोखा न दे दे। वह किसी की मदद भी नहीं करता था।

एक दिन गांव में एक संत आए। लोगों ने उनसे जीवन का सबसे बड़ा सुख पूछना शुरू किया। सेठ धनपाल ने गर्व से कहा, “महाराज! धन ही सबसे बड़ा सुख है, जिसके पास धन है, उसके पास सब कुछ है।” संत मुस्कुराए और बोले, “कल सुबह तुम दोनों मेरे साथ चलना।” अगले दिन संत पहले माधव के घर पहुंचे। माधव अपने परिवार के साथ साधारण भोजन कर रहा था। उसने संत और सेठ का आदरपूर्वक स्वागत किया और जो भी भोजन था, प्रेम से उनके सामने परोस दिया। भोजन करते समय पूरे परिवार के चेहरे पर संतोष और अपनापन झलक रहा था। इसके बाद वे सेठ के महल पहुंचे। वहां तरह-तरह के व्यंजन बने थे, लेकिन सेठ अकेला बैठा था। नौकर-चाकर उसके आदेश का इंतजार कर रहे थे। भोजन की थाली सामने थी, फिर भी वह हिसाब-किताब में उलझा हुआ था। उसके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी।

संत ने दोनों को पास बुलाया और पूछा, “तुम दोनों में सबसे अमीर कौन है?” सेठ तुरंत बोला, “यह भी कोई पूछने की बात है? मेरे पास अपार संपत्ति है।” संत ने शांत स्वर में कहा, “जिसके पास धन है, वह धनी हो सकता है, लेकिन अपने पास जो है, उसमें संतुष्ट है, जो प्रेम बांटता है और दूसरों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है, वही वास्तव में सबसे अमीर है।” माधव ने सिर झुका लिया। सेठ पहली बार मौन हो गया। उसे समझ आ गया कि वर्षों से वह धन तो जोड़ता रहा, लेकिन सुख, अपनापन और संतोष खोता गया। उस दिन से सेठ ने अपना व्यवहार बदल दिया। उसने जरूरतमंदों की सहायता शुरू की, परिवार के साथ समय बिताना शुरू किया और धीरे-धीरे उसके चेहरे पर भी वही मुस्कान लौट आई, जो पहले केवल माधव के चेहरे पर दिखाई देती थी। कहानी से सीख मिलती है कि सच्ची समृद्धि धन के संग्रह में नहीं, बल्कि संतोष, प्रेम, उदारता और अच्छे कर्मों में होती है।