‘A फॉर Apple नहीं, अमरूद पढ़ाइए’, अनिरुद्धाचार्य का नया गुरू मंत्र वायरल, बोले- इससे मजबूत होगी भारत की अर्थव्यवस्था

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें वह बच्चों को ‘A for Apple’ की जगह ‘A for अमरूद’ पढ़ाने की वकालत करते नजर आ रहे हैं। उनका तर्क है कि भारतीय बच्चों को देशी फल से जोड़ने से भारतीय किसानों और अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है।

लखनऊः कथावाचक अनिरुद्धाचार्य का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में वह बच्चों की शुरुआती पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाले ‘A for Apple’ के उदाहरण पर सवाल उठाते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को ‘A for Apple’ की बजाय ‘A for अमरूद’ पढ़ाया जाना चाहिए।

अनिरुद्धाचार्य ने इसके पीछे देशी उत्पादों, भारतीय किसानों और अर्थव्यवस्था से जुड़ा तर्क दिया है। उनका कहना है कि अमरूद भारत में आसानी से मिलने वाला फल है और इसे बच्चों की शिक्षा से जोड़ने से देशी फल तथा किसानों को बढ़ावा मिल सकता है।

अनिरुद्धाचार्य बोले- Apple विदेशी फल, अमरूद भारत में आसानी से मिलता है

वीडियो में अनिरुद्धाचार्य कहते हैं कि बच्चों को बचपन से ही ‘A for Apple’ पढ़ाया जाता रहा है। उनका तर्क है कि Apple अमेरिका से जुड़ा विदेशी फल है, जबकि भारत में अमरूद आसानी से उगाया और खाया जाता है।

उनके मुताबिक, जिस तरह अमेरिका में Apple आसानी से उपलब्ध है, उसी तरह भारत में अमरूद कई जगहों पर उगाया जा सकता है। ऐसे में बच्चों को ‘A for Apple’ की जगह ‘A for अमरूद’ पढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए।

‘A for अमरूद पढ़ेंगे तो दुनिया अमरूद खाना चाहेगी’

अनिरुद्धाचार्य ने शिक्षा में बदलाव की जरूरत बताते हुए कहा कि बच्चों की शुरुआती पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाले उदाहरणों का भी उनके सोचने और पसंद पर असर पड़ सकता है।

उनका कहना है कि जब बच्चे ‘A for Apple’ पढ़ते हैं तो उनके मन में Apple खाने की इच्छा पैदा होती है। इसके विपरीत अगर उन्हें ‘A for अमरूद’ पढ़ाया जाए तो अमरूद के प्रति भी आकर्षण बढ़ सकता है।

उन्होंने इसी तर्क को भारतीय किसानों और अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि देश में अमरूद की मांग बढ़ेगी तो किसानों को इसका फायदा मिल सकता है।

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‘विदेशी किसान नहीं, भारतीय किसान मजबूत होना चाहिए’

अनिरुद्धाचार्य के मुताबिक, भारत में शिक्षा के उदाहरणों में स्थानीय उत्पादों और फलों को प्राथमिकता देने से देश के किसानों को प्रोत्साहन मिल सकता है।

उनका कहना है कि अगर बच्चों को लगातार विदेशी उत्पादों से जुड़े उदाहरण दिए जाएंगे तो उनकी पसंद भी उसी दिशा में जा सकती है। वहीं भारतीय फलों को बढ़ावा मिलने से देश के किसानों और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

उन्होंने दावा किया कि भारत में बड़ी मात्रा में Apple विदेश से आता है। उनके मुताबिक, अगर बच्चों को बचपन से अमरूद से जोड़ा जाता तो भारतीय फल की मांग और उत्पादन को बढ़ावा मिल सकता था।

‘अमरूद भारत से अमेरिका जाए, यह अच्छा होगा’

अनिरुद्धाचार्य ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भारत को ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जिसमें भारतीय उत्पाद दूसरे देशों तक पहुंचें।

उन्होंने कहा कि यदि भारत का अमरूद अमेरिका जैसे देशों में निर्यात हो और वहां के लोग भारतीय अमरूद खाएं तो यह भारतीय किसानों और देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर स्थिति होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि Apple और अमरूद दोनों अपनी-अपनी जगह अच्छे फल हो सकते हैं, लेकिन उनके अनुसार अमरूद में मौजूद गुणों के कारण इसे अधिक प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

शिक्षा में बदलाव को लेकर अनिरुद्धाचार्य की अपील

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि देश को विकसित बनाने के लिए शिक्षा में भी कुछ बदलाव किए जाने की जरूरत है। उनका जोर इस बात पर है कि बच्चों को पढ़ाते समय ऐसे उदाहरणों का इस्तेमाल किया जाए, जिनका संबंध भारतीय संस्कृति, स्थानीय उत्पादों और देश की अर्थव्यवस्था से हो।

इसी विचार के आधार पर उन्होंने ‘A for Apple’ को बदलकर ‘A for अमरूद’ करने की बात कही है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में क्यों आया बयान?

अनिरुद्धाचार्य का यह बयान इसलिए तेजी से चर्चा में आया क्योंकि ‘A for Apple’ बच्चों की शुरुआती अंग्रेजी शिक्षा में इस्तेमाल होने वाला बेहद आम उदाहरण है। इसे बदलकर ‘A for अमरूद’ करने का उनका सुझाव शिक्षा के साथ-साथ देशी उत्पाद, किसान और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था से जोड़कर पेश किया गया है।

हालांकि, यह अनिरुद्धाचार्य का व्यक्तिगत तर्क और सुझाव है। इसे किसी आधिकारिक शिक्षा नीति में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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