सुपरमैसिव ब्लैक होल रोक देता है नए तारों का जन्म, भारतीय वैज्ञानिकों ने खोला आकाशगंगा के विकास का रहस्य
500 से अधिक आकाशगंगाओं के अध्ययन में सामने आया अहम तथ्य; ब्लैक होल से निकलने वाली शक्तिशाली गैस और जेट ठंडी गैस को बाहर धकेलकर तारों के निर्माण को प्रभावित करती हैं
ब्रह्मांड की असीम शक्तियों में शुमार सुपर मेसिव ब्लैकहोल न केवल अपने नजदीक आने वाले ग्रह और तारों की निगल जाता है, बल्कि नए तारों को जन्म के विकास को रोक लेता है। भारतीय खगोल वैज्ञानिकों ने आकाश गंगाओं में नए तारों का निर्माण रुकने की महत्वपूर्ण खोज की है। यह खोज बताती है कि ब्लैक होल किस तरह आकाश गंगा के विकास को प्रभावित करता है।
आकाश गंगाओं के बीच अदृश्य ब्लैकहोल के बारे में हम जानते हैं और यह भी समझते हैं कि यह इतना ताकतवर होता है कि अपने नजदीक आने वाले बड़े तारों और प्रकाश को भी निगल जाता है। किसी बड़े तारे को निगलने का बाद ही नए तारों के निर्माण रुकने की कहानी शुरू होती है। इस खोज में वैज्ञानिकों ने 500 से अधिक आकाश गंगाओं और उनके बीच सुपर मेसिव ब्लैकहोल का अध्ययन किया और देखा कि ब्लैकहोल के आसपास पदार्थ तेजी से गिरता है यानि किसी तारे को ब्लैक होल निगलता है तो ब्लैकहोल के भीतर से अत्यधिक ऊर्जा वाली रेडिएशन और लगभग प्रकाश की गति से चलने वाली कॉस्मिक जेट्स बाहर निकलता हैं। ब्लैकहोल से जेट बाहर निकलने की गति 2000 किमी प्रति सेकंड हो सकती है। ब्लैकहोल में जमा रेडिएशन जेट के साथ मिलकर ब्लैकहोल के केंद्र से गैस को बाहर धकेल ददेता हैं। इस प्रतिक्रिया में जेट से निकलने वाली गैस नए तारों का जन्म लगभग रुक जाता है।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स बेंगलुरु और इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स पुणे के वैज्ञानिकों ने यह खोज की है। वैज्ञानिक डॉ. पायल नंदी के नेतृत्व में यह शोध किया गया। खोजकर्ता वैज्ञानिकों के अनुसार, उन्होंने आकाश गंगाओं के केंद्र में सक्रिय सुपरमैसिव ब्लैक होल के भीतर से 2,000 किमी प्रति सेकंड तक की रफ्तार से निकलने वाली गैस का अध्ययन किया। तब पता चला कि ब्लैक होल के आसपास से निकलने वाली गर्म आयनित गैस की धाराएं बेहद शक्तिशाली हैं। ब्लैक होल की ऊर्जा गैस को बाहर धकेलने वाली मुख्य शक्ति है और जेट उस प्रक्रिया के 'बूस्टर' की तरह आगे बढ़ाने का काम करती हैं।
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ये जेट ब्लैक होल के आसपास से निकलने वाले अत्यधिक ऊर्जावान कणों की संकरी धाराएं होती हैं, जो लगभग प्रकाश की गति से आगे बढ़ती हैं और नए तारों को जन्म देने वाली ठंडी धूल और गैस को अपने साथ उड़ा ले जाती है। जिस कारण जन्म ले रहे तारों का निर्माण रुक जाता है। यह शोध एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
आकाशगंगा विकास और तारों के निर्माण को लेकर अहम खोज
नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे बताते हैं कि, ऐसा कई बार देखा जा चुका है कि आकाश गंगाओं में तारों के नए तारों का निर्माण रुक सा गया है जिस कारण आकाश गंगा का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। इस रहस्य को समझने के लिए यह शोध किया गया और तब यह जानकारी निकलकर सामने आई कि ब्लैकहोल से निकलने वाले जेट के कारण आकाश गंगा प्रभावित होती है जिससे नए तारों का निर्माण नहीं हो पाता है। इस खोज से काफी हद तक नए तारों के निर्माण में व्यवधान स्पष्ट हो जाता है।
-बबलू चंद्रा, नैनीताल
