बुलंदियों के क्षितिज पर भारत

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अरविंद जयतिलक,
वरिष्ठ पत्रकार

देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा का जयघोष से देश झंकृत और चमत्कृत है। स्वाभिमान से देश का माथा दमक रहा है। अटक से कटक और कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर घर तिरंगा की ऊंची शान से आसमान गुंजायमान है। पर्वत, पठार नदियां, झरने सबसे आजादी के तराने प्रस्फुटित हो रहे हैं। पक्षियों का कलरव, भंवरों का गुंजन और मलयगिरी से उठती सुगंधियां भारत की समृद्धि-समरसता और एकता-अखंडता के भाव को लयबद्ध कर रही हैं।

सड़कों, संस्थानों व प्रतिष्ठानों से उठती इंकलाब की गूंजे और वंदे मातरम के मधुर स्वर उन परवानों की याद दिला रहे हैं, जिन्होंने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। अधीनता से आजादी तक का सफर त्याग और बलिदान का हैं। पतन से उत्थान तक का है। समर्पण और संकल्प का है। समर्पण व संकल्प का यह उच्चतम भाव और अनवरत आठ दशक की साधना से ही आज भारत उपलब्धियों के आसमान पर है। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए देश को कई बदलावों से गुजरना पड़ा है। नतीजा आज देश संपूर्ण दुनिया को अपनी सामाजिक-आर्थिक व सांस्कृतिक उपलब्धियों की विराटता का बोध करा रहा है।

आज भारत दुनिया का सबसे सफल लोकतांत्रिक देश बन चुका है, जिसकी सराहना दुनियाभर में होती है। आजादी के बाद ही भारत ने अपने सभी नागरिकों को ढेरों अधिकार दे दिए, जिससे नागरिकों को अपने व्यक्तित्व को संवारने की आजादी मिली। आज के भारत में जाति, धर्म, रंग, लिंग, कुल, गरीब व अमीर आदि के आधार समान है। जनमत का समर्थक भारत ने संसदीय शासन प्रणाली में सभी वर्गों को समान प्रतिनिधित्व प्रदान किया है। आज भारत में सत्ता प्राप्ति के लिए खुलकर प्रतियोगिता होती है और साथ ही लोगों को चुनाव में वोट के द्वारा अयोग्य प्रतिनिधियों को हटाने का मौका भी देता है। देश का संविधान राज्य के लोगों की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों में अनुचित हस्तक्षेप करने का अधिकार सरकारों को नहीं दिया है। 

भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है कि राजनीतिक दल सभाओं, भाषणों, समाचार पत्रों, पत्रिकाओं तथा अन्य संचार माध्यमों से जनता को अपनी नीतियों और सिद्धांतों से अवगत कराते हैं। विरोधी दल संसद में मंत्रियों से प्रश्न पूछकर, काम रोको प्रस्ताव रखकर तथा वाद-विवाद द्वारा सरकार के भूलों को प्रकाश में लाते हैं। सरकार की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हुए उसकी नीतियों और कार्यों की आलोचना करते हैं।

भारत ने धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी इच्छानुसार शिक्षण संस्थाएं स्थापित करने तथा धन का प्रबंध करने का अधिकार दिया है। भारतीय लोकतंत्र में शिक्षण-संस्थाओं को सहायता देते समय राज्य किसी शिक्षण संस्था के साथ इस आधार पर भेदभाव नहीं करता है, कि वह संस्था धर्म या भाषा पर आधारित किसी अल्पसंख्यक वर्ग के प्रबंध में है। इसी तरह भारतीय नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार हासिल है। इस व्यवस्था ने भारतीय नागरिकों को शासन-प्रशासन से सीधे सवाल-जवाब करने की नई लोकतांत्रिक धारणा को जन्म दिया है।

इस व्यवस्था से सरकारी कामकाज में सुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व बढ़ा है, जिससे आर्थिक विकास को तीव्र करने, लोकतंत्र की गुणवत्ता बढ़ाने और भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है। सूचना के अधिकार से सत्ता की निरंकुशता पर अंकुश लगा है। यह चमकते-दमकते भारत का शानदार चेहरा है। 274 रुपये प्रति व्यक्ति आय के साथ शुरू हुआ आजादी का आर्थिक सफर आज भारत को दुनिया की ताकतवर आर्थिक महाशक्तियों की कतार में खड़ा कर दिया है। वह दिन दूर नहीं, जब भारत 2040 तक दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल कर लेगा। 

आज भारत की अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुकी है। यह भारत की समृद्धि, ताकत और तरक्की की पहचान है। सच कहें, तो आज भारत हर रोज तरक्की की नई इबारत लिख रहा है। कल-कारखाने, उद्योग धंधे और औद्योगीकरण से विकास का पहिया तेजी से घूम रहा है। औद्योगीकरण और वैश्वीकरण ने भारतीय शिक्षा, विज्ञान व संचार के क्षेत्र को एक नया आयाम दिया है, जिसके जरिए वह नए-नए इनोवेशन के जरिए दुनिया को अचंभित कर रहा है।

आज देश में कई विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान हैं। इनके जरिए आज भारतीय छात्र दुनियाभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। कभी भारत अपने उपग्रह को स्थापित करने के लिए अमेरिका और रुस की मदद लेता था, लेकिन आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो हर रोज नया कीर्तिमान रच रहा है। इसरो के जरिए स्वदेशी उपग्रहों के साथ कई विदेशी उपग्रह एक साथ भेजे जा रहे हैं। इन 79 वर्षों में देश ने समाज के अंतिम पांत के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए सामाजिक सुरक्षा व सेवाओं का विस्तार किया है। (ये लेखक के निजी विचार हैं)
        

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