वंदे मातरम् का अपमान अब होगा अपराध : राष्ट्रपति मुर्मू ने विधेयक को दी मंजूरी
पुराने कानून में वंदे मातरम् को नहीं मिला था कानूनी संरक्षण
नयी दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने को अपराध बनाया गया है। इस कानून के तहत वंदे मातरम् को वही कानूनी संरक्षण मिलेगा, जो वर्तमान में राष्ट्रगान को प्राप्त है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।
राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 कानून बन गया है। लोकसभा में 30 जुलाई को यह विधेयक पारित हुआ था, जबकि राज्यसभा ने इसे एक दिन पहले ही मंजूरी दे दी थी। इस कानून के तहत वंदे मातरम् को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान दर्जा प्राप्त है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लालकिले की प्राचीर से वंदे मातरम् गाया जाएगा। इससे पहले, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्रगान 'जन गण मन' के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे गायन में शामिल किसी सभा में व्यवधान डालना प्रतिबंधित था। इन अपराधों के लिए तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान था।
वहीं, दूसरी और उसके बाद की प्रत्येक दोषसिद्धि पर कम से कम एक साल की जेल की सजा का प्रावधान था। हालांकि, पुराने कानून में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को इसी तरह का कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं था। विधेयक में कहा गया था, ''वर्तमान में, राष्ट्रगीत के रूप में सम्मानित वंदे मातरम् के गायन का अपमान रोकने के लिए कोई विशिष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। इसलिए, किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन को रोकने या ऐसे गायन में संलग्न किसी भी सभा में बाधा उत्पन्न करने से प्रतिबंधित करने के लिए, उक्त अधिनियम की धारा तीन में संशोधन करके राष्ट्रगीत को भी इसके दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि ऐसे कृत्यों को दंडनीय बनाया जा सके।''
विधेयक में कहा गया कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी, 1950 को कहा था कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम्, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, को राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान सम्मान दिया जाएगा और इसका दर्जा भी राष्ट्रगान के बराबर होगा।
इस साल की शुरुआत में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि जब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान एक साथ बजाए जाएं, तो सबसे पहले वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे। गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को जारी एक आदेश में पहली बार राष्ट्रगीत के गायन के लिए प्रोटोकॉल तय किए।
इसमें निर्देश दिया गया कि वंदे मातरम् के छह अंतरे, जिनकी अवधि तीन मिनट 10 सेकंड है, राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राज्यपालों के भाषण जैसे आधिकारिक कार्यक्रमों में गाए जाएंगे। आदेश में कहा गया, ''जब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए या बजाए जाएं, तो सबसे पहले राष्ट्रगीत गाया या बजाया जाएगा।'' इसमें कहा गया कि जिस सभा या कार्यक्रम में राष्ट्रगीत गाया जाए, वहां मौजूद सभी लोग सावधान की मुद्रा में खड़े रहेंगे। इस आदेश में कहा गया कि सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ की जाएगी।
