बलरामपुर : फिरोज पप्पू हत्याकांड में दो दोषियों को उम्रकैद, पूर्व सांसद समेत तीन बरी

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Edited By Virendra Pandey
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80-80 हजार रुपये मृतक की पत्नी को देने के आदेश, चार साल चली सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने सुनाया फैसला

बलरामपुर, अमृत विचार : जिले के बहुचर्चित तुलसीपुर नगर पंचायत अध्यक्ष फिरोज अहमद उर्फ पप्पू हत्याकांड में करीब चार वर्ष चली सुनवाई के बाद मंगलवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसला सुनाया। विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार तृतीय ने सह अभियुक्त मेराजुल हक और महफूज को हत्या का दोषी मानते हुए दोनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की धनराशि में से 80-80 हजार रुपये मृतक फिरोज पप्पू की पत्नी को दिए जाने के आदेश दिए गए हैं। वहीं, पूर्व सांसद रिजवान जहीर, उनकी बेटी जेबा रिजवान और दामाद रमीज नेमत को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया था।

सरकारी वकील (जिला शासकीय अधिवक्ता) कुलदीप सिंह के अनुसार चार जनवरी 2022 की रात तुलसीपुर-जरवा मार्ग पर तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष फिरोज अहमद उर्फ पप्पू की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद मृतक के भाई अफरोज की तहरीर पर तुलसीपुर थाने में पूर्व सांसद रिजवान जहीर, जेबा रिजवान, रमीज नेमत, महफूज और मेराजुल हक के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।

पुलिस ने नौ जनवरी 2022 को पूर्व सांसद समेत सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना पूरी होने के बाद पांचों के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण इसकी सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। पत्रावली में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों को भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। करीब चार वर्ष तक चली सुनवाई में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से साक्ष्य एवं तर्क प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद सात अगस्त को अदालत ने पूर्व सांसद रिजवान जहीर, जेबा रिजवान और रमीज नेमत को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया था, जबकि मेराजुल हक और महफूज के संबंध में फैसला 11 अगस्त के लिए सुरक्षित रखा गया था।

मंगलवार को सुरक्षित फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश प्रदीप कुमार तृतीय ने मेराजुल हक और महफूज को हत्या का दोषी करार देते हुए दोनों को उम्रकैद और एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि सरकार न्यायालय के निर्णय और पत्रावली का अध्ययन करेगी। इसके बाद विधिक राय के आधार पर निर्णय के विरुद्ध अपील किए जाने के संबंध में आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

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