माटी के वे वीर, जिन्होंने तिरंगे के लिए दे दी जान; शाहजहांपुर के रणबांकुरों की शौर्यगाथा
आजादी की लड़ाई से लेकर भारत-चीन और भारत-पाक युद्धों तक शाहजहांपुर के जवानों ने दिखाई अदम्य वीरता, विभिन्न सैन्य अभियानों में भी कई वीरों ने दिया सर्वोच्च बलिदान
देश की आजादी की लड़ाई के तीन अमर नायकों की कहानी सभी को पता है, पर आजादी के बाद भी ऐसे तमाम मौके आए, जब शाहजहांपुर के वीर जवानों ने देश की खातिर जान देने में तनिक भी देर नहीं लगाई। यह वह मतवाले थे, जिन्होंने दुश्मनों को नाकों चने चबवा दिए, इसके बाद वह खुद वीरगति को प्राप्त हुए। देश पर मर मिटने वाले ऐसे हीरो के बारे में शाहजहांपुर के कुछ ही लोगों को पता है।
शाहजहांपुर के लोगों ने प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में भी अपनी वीरता का परिचय दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान शाहजहांपुर के जवानों के लिए कहा जाता था कि वह किस मिट्टी के बने हैं, उन्हें भूख नहीं लगती है और न ही उन्हें प्यास लगती है। वह केवल लड़ना ही जानते हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध में योगदान देने वाले सैनिकों की याद में कटरा और जलालाबाद में आज भी स्तंभ स्थापित हैं। ग्रेनेड चलाना हो, तोप चलाना हो या फिर हवाई जहाज से कूदना हो सब फन में शाहजहांपुर के वीर जवानों ने अपना लोहा मनवाया है। देश की सीमा पर दुश्मन से तो लड़ना तब भी आसान माना जाता है, क्योंकि पता होता है कि सामने दुश्मन ही है और उसे मारना है। पर शाहजहांपुर के रणबांकुरों ने तो देश के अंदर छिपे बैठे दुश्मनों को भी चुन-चुन कर मारा है, यह काम इसलिए कठिन माना जाता है, वह दुश्मन अपनों के बीच में छिपा बैठा होता था। सेना की विभिन्न रेजीमेंटों और कोरों में भर्ती होने के बाद बहुत लंबी नौकरी किसी ने नहीं की। अधिकतम दस साल के अंदर ही शाहजहांपुर के वीर जवानों ने विभिन्न युद्धों, मुठभेड़ों और आपरेशनों में वीरगति पाई। शाहजहांपुर का सेना में बड़ा योगदान रहा है। आजादी की जंग में जिस तरह से दीवाने कूदे थे। वह जज्बा आज भी कायम है। यहां के युवाओं के खून देशप्रेम बहता है। उसी के बल पर फौजियों ने हमेशा ही दुश्मनों के दांत खट्टे किए हैं।
भारत-चीन युद्ध में शहीदों के नाम
कैप्टन कन्हैयालाल, ग्रेनेडियर कुतुबुददीन खान-4 ग्रेनेडियर कोर, एनसीई नन्हें लाल- वीईजी किरकी, सिपाही राजेंद्र सिंह-राजपूत रेजीमेंट, आरएम रामपाल सिंह-राजपुताना राइफल, सिपाही बलवीर सिंह-तोपखाना, सिपाही छोटे सिंह-तोपखाना, सिपाही दृगपाल सिंह-तोपखाना, सिपाही मुरारी सिंह-तोपखाना।
भारत-पाकिस्तान युद्ध में शहीदों के नाम
नायक जदुनाथ सिंह-राजपूत रेजीमेंट/ पहलवान सिंह-राजपूत रेजीमेंट/ सिग्नलमैन राजाराम गुप्ता-सिग्नल कोर/ सिपाही मलूक-सिख रेजीमेंट/ कमल किशोर-आर्मड रेजीमेंट/ लांस नायक दृगपाल सिंह-14 राजपूत रेजीमेंट/ नायक अनोख सिंह-पंजाब रेजीमेंट/जीडी रामहरी सिंह-9 गार्डस रेजीमेंट/ लांस नायक प्रतिपाल सिंह-तोपखाना/सिपाही चिरौंजी लाल-तोपखाना/ सब लेफ्टिनेंट शशि प्रकाश-तोपखाना/ सिपाही विद्याराम-तोपखाना।
विभिन्न ऑपरेशनों में शहीदों के नाम
पीटीआर सत्यपाल सिंह-1 पैरा रेजीमेंट-आपरेशन ब्लू स्टार-1984/ हवलदार विक्रम सिंह- 13 मैकनाइज्ड इंफेंट्री-आपरेशन पवन-1987/ सिपाही मूलचंद्र वाल्मीकी-एएससी बटालियन-आपरेशन पवन-1988/सिपाही सुरेश कुमार शर्मा-राजपूत रेजीमेंट- आपरेशन पवन-1987/ नायब सूबेदर सुनील कुमार-इंटेलीजेंस कोर-आंतकवादियों से मुठभेड़-1999/ देवेंद्र सिंह-तोपखाना-श्रीनगर कुपवाड़ा में आंतकवादियों से मुठभेड़-2005/ सिपाही रमेश चंद्र-4 जाट रेजीमेंट-आपरेशन कारगिल-1999।
द्वितीय विश्वयुद्ध के शहीदों के नाम
- सिपाही लाखन, सिपाही कुबेर सिंह
- 1948 युद्ध के शहीद-सिपाही महेंद्र सिंह
जिले में पदक विजेता सैनिक
- 1948 में जलालाबाद तहसील के खजुरी गांव निवासी नायक जदुनाथ सिंह को मरणोपरांत परमवीर वीर चक्र प्रदान किया गया।
- 1971 में भारत-पाक लड़ाई में दृगपाल सिंह शहीद हुए। उनको महावीर चक्र दिया गया।
- इसके अलावा नरवीर सिंह को अशोक चक्र मिला है।
- 1994 में मेजर आशुतोष शुक्ला सेना मेडल
- 1996 कर्नल अभय कुमार सिंह विशिष्ट सेवा मेडल
- 2004 में हवलदार बलराम सिंह चौहान को सेना मेडल
- कैप्टन आनंद सिंह व कैप्टन खजान सिंह को द्वितीय विश्व युद्ध एसबीओबीआई मिला।
- विवेक सेंगर, वरिष्ठ पत्रकार
