सही हेल्थ इंश्योरेंस बुजुर्गों की आर्थिक सुरक्षा

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रजत मेहरोत्रा
वित्तीय एवं आर्थिक विशेषज्ञ

भारत तेजी से वृद्ध होती आबादी वाले देशों में शामिल हो रहा है। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के कारण लोगों की औसत आयु बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ एक नई चुनौती भी सामने आ रही है-बढ़ते चिकित्सा खर्च। उम्र बढ़ने के साथ अस्पताल में भर्ती होने, सर्जरी, हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में यदि किसी वरिष्ठ नागरिक के पास उचित स्वास्थ्य बीमा नहीं है, तो जीवनभर की जमा-पूंजी कुछ ही दिनों में समाप्त हो सकती है। 

आज कई लोग केवल कम प्रीमियम देखकर स्वास्थ्य बीमा खरीद लेते हैं। यह सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। अच्छी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का उद्देश्य केवल सस्ता प्रीमियम नहीं, बल्कि बीमारी के समय अधिकतम वित्तीय सुरक्षा देना होना चाहिए। इसलिए वरिष्ठ नागरिकों के लिए सही हेल्थ इंश्योरेंस चुनना एक निवेश है, खर्च नहीं। सबसे पहला नियम है कि स्वास्थ्य बीमा जितनी जल्दी लिया जाए, उतना बेहतर होता है। कम उम्र में पॉलिसी लेने पर प्रीमियम अपेक्षाकृत कम रहता है, मेडिकल जांच आसान होती है और प्रतीक्षा अवधि भी समय रहते पूरी हो जाती है। यदि व्यक्ति लगातार पॉलिसी का नवीनीकरण करता रहे, तो भविष्य में कई लाभ बने रहते हैं।  दूसरा महत्वपूर्ण पहलू पर्याप्त बीमा राशि का चयन है। आज महानगरों में किसी गंभीर बीमारी का उपचार लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े शहरों में रहने वाले अधिकांश परिवारों को अपनी आवश्यकताओं, अस्पताल की पसंद और चिकित्सा इतिहास के अनुसार पर्याप्त बीमा राशि का चयन करना चाहिए। कई मामलों में बेस हेल्थ पॉलिसी के साथ सुपर टॉप-अप प्लान जोड़ना अपेक्षाकृत कम लागत में अधिक सुरक्षा प्रदान कर सकता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए केवल अस्पताल खर्च का बीमा पर्याप्त नहीं होता। पॉलिसी में कई महत्वपूर्ण सुविधाओं की जांच आवश्यक है। उदाहरण के लिए कैशलेस अस्पतालों का बड़ा नेटवर्क, डे-केयर प्रक्रियाओं की व्यापक कवरेज, अस्पताल में भर्ती होने से पहले और बाद के खर्चों की सुविधा, डोमिसिलियरी या होम केयर उपचार की शर्तें तथा नो-क्लेम बोनस जैसी सुविधाएं भविष्य में आर्थिक राहत देती हैं।

हालांकि इन सभी सुविधाओं की सीमा और शर्तें प्रत्येक बीमा कंपनी में अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए पॉलिसी दस्तावेज ध्यान से पढ़ना आवश्यक है। स्वास्थ्य बीमा खरीदते समय सबसे अधिक नजरअंदाज किया जाने वाला विषय है-एक्सक्लूजन। कई लोग केवल बीमा राशि देखकर पॉलिसी खरीद लेते हैं, लेकिन यह नहीं देखते कि किन बीमारियों पर प्रतीक्षा अवधि लागू है, किन उपचारों पर उप-सीमा है, कितना को-पेमेंट देना होगा या कमरे के किराये पर कोई सीमा है या नहीं। बाद में यही छोटी-छोटी शर्तें बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन जाती हैं। इसलिए केवल ब्रॉशर नहीं, बल्कि पूरी पॉलिसी की शर्तों को समझना अत्यंत आवश्यक है।

सरकार द्वारा संचालित आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार पात्र 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के नागरिकों को निर्धारित नियमों के अंतर्गत प्रति परिवार प्रतिवर्ष ₹5 लाख तक की स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि सरकारी योजना व्यापक निजी स्वास्थ्य बीमा का विकल्प नहीं है।

इसे एक अतिरिक्त सुरक्षा के रूप में देखना चाहिए। किसी भी तथ्य को छिपाना भविष्य में दावा अस्वीकृत होने का कारण बन सकता है। भारत में चिकित्सा सेवाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। निजी अस्पतालों में गंभीर बीमारियों का इलाज कई लाख रुपये तक पहुंच सकता है। ऐसे में केवल बचत के भरोसे रहना पर्याप्त नहीं है। उचित स्वास्थ्य बीमा परिवार की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल उपचार का खर्च उठाता है, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद संचित पूंजी को भी सुरक्षित रखने में मदद करता है।

अंततः यह समझना होगा कि स्वास्थ्य बीमा खरीदने का उद्देश्य सबसे सस्ती पॉलिसी लेना नहीं, बल्कि सबसे उपयुक्त सुरक्षा प्राप्त करना है। थोड़े कम प्रीमियम के लालच में यदि व्यक्ति आवश्यक सुविधाओं से समझौता कर लेता है, तो बीमारी के समय उसे कहीं अधिक राशि अपनी जेब से खर्च करनी पड़ सकती है। इसलिए वरिष्ठ नागरिकों और उनके परिवारों को पॉलिसी खरीदने से पहले कवरेज, प्रतीक्षा अवधि, को-पेमेंट, अस्पताल नेटवर्क, सुपर टॉप-अप की उपलब्धता, दावा प्रक्रिया और भविष्य की जरूरतों का गंभीरता से मूल्यांकन करना चाहिए। याद रखिए अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी केवल इलाज का खर्च नहीं चुकाती, बल्कि बुजुर्गों की आर्थिक स्वतंत्रता, सम्मान और मानसिक शांति की भी रक्षा करती है। सही समय पर लिया गया सही निर्णय ही जीवनभर की सबसे मूल्यवान सुरक्षा बन सकता है। (ये लेखक के निजी विचार हैं)

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