Kanpur News : 16 साल बाद KDA की बड़ी जीत! 39.65 करोड़ की सीलिंग जमीन से हटा स्टे, 12 हजार वर्गगज पर अब होगा नियोजन
हाईकोर्ट ने 39.65 करोड़ की जमीन पर सुनाया फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 साल पुराने सीलिंग भूमि विवाद में केडीए के पक्ष में फैसला सुनाया है। ग्राम बारा में 12,008 वर्ग गज जमीन पर दाखिल रिट याचिका खारिज होने के साथ स्थगन आदेश भी समाप्त हो गया। करीब 39.65 करोड़ रुपये मूल्य की इस जमीन के नियोजन और निस्तारण का रास्ता साफ हो गया है।
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) को 16 साल पुराने सीलिंग भूमि विवाद में बड़ी राहत मिली है। ग्राम बारा, सिरोही तहसील सदर स्थित 12,008 वर्ग गज (करीब 1.07 हेक्टेयर) सीलिंग भूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने कृष्ण कुमार मिश्रा व अन्य की ओर से दाखिल रिट याचिका खारिज करते हुए जमीन को लेकर जारी स्थगन आदेश भी समाप्त कर दिया। आवासीय सर्किल दर के मुताबिक इस जमीन की कीमत करीब 39 करोड़ 65 लाख 80 हजार रुपये है। अब केडीए इस बेशकीमती जमीन का नियोजन कर निस्तारण कर सकेगा।
प्राधिकरण के मुताबिक ग्राम बारा की आराजी संख्या 357, 358, 359 और 360 की कुल 12,008 वर्ग गज भूमि को नगर भूमि सीमा अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के तहत सीमाधिक्य घोषित किया गया था। इसके बाद भूमि पर प्राधिकरण का कब्जा प्राप्त हो गया था। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए कृष्ण कुमार मिश्रा व अन्य ने वर्ष 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका संख्या 12144/2010 दाखिल की थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दावा किया गया था कि उन्हें भूमि का मुआवजा नहीं मिला है। साथ ही जमीन को सीलिंग से मुक्त किए जाने की मांग भी की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान वर्ष 2010 से ही स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश प्रभावी रहा। इसके चलते करीब 16 वर्षों तक जमीन का निस्तारण नहीं हो सका।
अब आगे बढ़ेगी निस्तारण की प्रक्रिया
लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रिट याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही जमीन पर लागू स्थगन आदेश भी समाप्त हो गया। प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित भूमि पर उसका भौतिक कब्जा पहले से है। अब नियोजन कर नियमानुसार भूमि के निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है।
सत शुक्ला, विशेष कार्याधिकारी (विधि), केडीए ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्णय से 16 वर्षों से लंबित प्रकरण का निस्तारण हो गया है। स्थगन आदेश समाप्त होने के बाद भूमि के नियोजन और निस्तारण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकेगी।
