लखनऊ में एनालॉग डेयरी उत्पादों पर एफएसडीए लगाएगा रोक
मिलावटी खाद्य पदार्थों की मौके पर होगी जांच, होगी कार्रवाई
लखनऊ, अमृत विचार : महाराष्ट्र, दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में एनालॉग डेयरी उत्पाद जैसे पनीर, खोवा और घी आदि पर एफएसएसआई की कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने भी इन उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। एफएसडीए लखनऊ में भी इन मिलावटी डेयरी उत्पादों पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाने जा रहा है।
इसके तहत मंडियों, रेस्टोरेंट, डेयरी में बिक रहे सेहत के लिए हानिकारक खाद्य पदार्थों पर जिला प्रशासन के निर्देशन में एफएसडीए कार्रवाई करके कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। प्रभारी अधिकारी एडीएम पूर्वी महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि लखनऊ में एनालॉग डेयरी उत्पादों पर कार्रवाई के लिए एफएसडीए को अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जनता की सेहत के लिए हानिकारक इन खाद्य पदार्थों पर पूरी तरह रोक लगाने के साथ कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या होते हैं एनालॉग डेयरी उत्पाद
मिलावटी एनालॉग डेयरी उत्पाद देखने में पारम्परिक डेयरी उत्पाद जैसे लगते हैं लेकिन इनका स्वाद अलग होता है। इसे मिल्क सॉलिड्स, पाम ऑयल और दूसरे फूड एडिटिव्स का इस्तेमाल करके बनाया जाता है। इसमें खर्च कम मुनाफा ज्यादा होता है। ये उत्पाद सेहत के लिए हानिकारक होते हैं। इन्हें डेयरी उत्पाद के तौर पर बेचना या परोसना फूड सेफ्टी नियमों का उल्लंघन है।
सिंथेटिक दूध और बनाया जाता है पनीर, खोवा में शकरकंद और स्टार्च
त्योहार के समय अधिक मांग को देखते हुए मिलावटखोर सिंथेटिक दूध से पनीर बनाकर बाजार में खपा देते हैं। इसे डिटर्जेंट, यूरिया, सल्फ्यूरिक एसिड, सोडा और केमिकल जैसी खतरनाक चीजों से तैयार किया जाता है। इसके अलावा खोया में आलू, सकरकंद, मैदा, अरारोट आदि की मिलावट की जाती है। चंद मुनाफे के लिए मिलावटखोर जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आते।
जुर्माने तक कार्रवाई सीमित, फैसला होने में लग जाते हैं कई वर्ष
मिलावटखोर इतने बेखौफ हो गए हैं कि एफएसडीए की कार्रवाई का भी उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। यदि पकड़े भी जाते हैं तो जुर्माने तक कार्रवाई सीमित रहती है। मिलावट की पुष्टि होने के बाद एडीएम पूर्वी की कोर्ट में एफएसडीए मुकदमा दर्ज कराता है लेकिन फैसला आने में कई वर्ष लग जाते हैं। एडीएम पूर्वी की कोर्ट में वर्षों से सैकड़ों वाद लम्बित हैं, जिससे मिलावटखोरों पर कार्रवाई में देरी होती है।
नामी कंपनियों के प्रोडक्ट भी मानक पर खरे नहीं उतर रहे
एफएसडीए की कार्रवाई के दौरान लिये गए नमूनों की जांच में यह सामने आ गया है कि नामी-गिरामी कंपनियों के प्रोडक्ट भी मानक पर खरे नहीं उतर रहे हैं। इनमें दूध और दूध से बने उत्पाद शामिल हैं। तय मानक से कम फैट की मात्रा मिलती है या बेस्ट बिफोर यूज की लेवलिंग में गड़बड़ी पायी जाती है।
