जब तस्वीरें बोलने लगीं और पोस्टर ने सुनाई सियासत की कहानी, ‘स्वराज’ में दिखा भारत का अनदेखा इतिहास

Amrit Vichar Network
Edited By Muskan Dixit
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गांधी की लैपटॉप वाली लाल प्रतिमा से नेहरू की दुर्लभ तस्वीर और 1857 के विद्रोह से आंदोलनों तक—कला, फोटोग्राफी और पुराने दस्तावेजों के जरिए राजनीतिक इतिहास को नए नजरिए से दिखा रही प्रदर्शनी

नई दिल्ली। भारत के राजनीतिक इतिहास को सिर्फ किताबों के पन्नों से नहीं, बल्कि तस्वीरों, कला, पोस्टरों, अखबारों और पुराने दस्तावेजों के जरिए देखने का मौका राजधानी दिल्ली में मिल रहा है। इंडिया हैबिटेट सेंटर में लगी ‘स्वराज: रिविजुअलाइजिंग इंडियाज पॉलिटिकल हिस्ट्री’ प्रदर्शनी में देश की राजनीतिक यात्रा के कई ऐसे दृश्य सामने आए हैं, जो इतिहास को एक अलग नजरिए से देखने को मजबूर करते हैं।

प्रदर्शनी में महात्मा गांधी की लैपटॉप के साथ बनी लाल रंग की विशेष प्रतिमा, आरएसएस के मुखपत्र ‘ऑर्गनाइजर’ में प्रकाशित पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का एक चित्र, पुराने राजनीतिक पोस्टर और 1857 के विद्रोह के साथ-साथ भारत में हुए विभिन्न आंदोलनों की तस्वीरें दर्शकों का ध्यान खींच रही हैं।

इतिहास किताबों से बाहर निकला, तस्वीरों में दिखी सियासत

इस प्रदर्शनी का आयोजन तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज (TRIS) की ओर से किया गया है। यहां दुर्लभ कलाकृतियों और तस्वीरों के साथ राजनीतिक पोस्टर, किताबें, फिल्मों के प्रचार से जुड़ी सामग्री, पुराने वीडियो तथा लिखित और ऑडियो रिकॉर्ड भी प्रदर्शित किए गए हैं।

इन सामग्रियों के जरिए यह समझने की कोशिश की गई है कि भारत की राजनीतिक यात्रा को अलग-अलग दौर में कैसे देखा गया, कैसे प्रस्तुत किया गया और बाद की पीढ़ियों ने उसे कैसे याद रखा।

गांधी से नेहरू तक, विरोध प्रदर्शनों की तस्वीरें भी

प्रदर्शनी में स्वतंत्रता आंदोलन और उसके बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़े कई दृश्य देखने को मिलते हैं। 1857 के विद्रोह से लेकर आधुनिक भारत में हुए विरोध प्रदर्शनों तक की तस्वीरें यहां इतिहास के अलग-अलग पड़ावों को सामने रखती हैं।

वहीं, नेहरू से जुड़ी तस्वीर और अलग-अलग दौर के राजनीतिक प्रकाशनों की सामग्री यह दिखाती है कि मीडिया ने भारत के राजनीतिक इतिहास को दर्ज करने और लोगों तक पहुंचाने में किस तरह भूमिका निभाई।

‘पाठ्यपुस्तकों से अलग इतिहास समझने की कोशिश’

टीआरआईएस के संस्थापक नेविल तुली के मुताबिक, भारत के राजनीतिक इतिहास को समझने के लिए उसकी यात्रा के हर पहलू के प्रति गहरी समझ जरूरी है।

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में पाठ्यपुस्तकों में दर्ज इतिहास के साथ-साथ मीडिया की भूमिका को भी शामिल किया गया है। इसमें अखबारों के अलावा ‘पीपुल्स वार एंड एज’, ‘ऑर्गनाइजर’ और ‘हिम्मत’ जैसी पत्रिकाओं की सामग्री भी प्रदर्शित की गई है।

इसके अलावा 1980 और 1990 के दशक में भारत में हिंसा और विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले रॉयटर्स के फोटो पत्रकारों की तस्वीरें भी प्रदर्शनी का हिस्सा हैं।

19 अगस्त तक देख सकेंगे प्रदर्शनी

‘स्वराज: रिविजुअलाइजिंग इंडियाज पॉलिटिकल हिस्ट्री’ प्रदर्शनी फिलहाल इंडिया हैबिटेट सेंटर में लगी है। दर्शकों के लिए इसे 19 अगस्त तक देखा जा सकता है।

यह प्रदर्शनी भारत के राजनीतिक अतीत को केवल घटनाओं की सूची के रूप में नहीं, बल्कि कला, तस्वीरों, मीडिया और जनस्मृतियों के जरिए समझने का प्रयास करती है।

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