यूपी के हापुड़ से जैश का आतंकी गिरफ्तार, एटीएस खंगाल रही संपर्क, लेनदेन और नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने का आरोप, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पाकिस्तान स्थित नेटवर्क तक रकम पहुंचाने की जांच
यूपी एटीएस ने हापुड़ में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने के आरोप में बिहार निवासी मो. जफर को गिरफ्तार किया है। एजेंसी के मुताबिक, उसके पाकिस्तान स्थित नेटवर्क से संपर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कथित आतंकी फंडिंग की जांच की जा रही है।
लखनऊ, अमृत विचार। उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने देशविरोधी गतिविधियों और आतंकी फंडिंग से जुड़े मामले में कार्रवाई करते हुए मो. जफर को गिरफ्तार किया है। एटीएस के मुताबिक, जफर के जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में रहने के साक्ष्य मिले हैं। वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला बताया गया है। एटीएस ने उसे हापुड़ के बहादुरगढ़ थाना क्षेत्र के शेरपुर गांव स्थित एक मस्जिद से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, पूछताछ और उसके डिजिटल उपकरणों की जांच में आतंकी नेटवर्क से जुड़े कई अहम इनपुट सामने आए हैं।
युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने का आरोप
एटीएस के मुताबिक, मो. जफर जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर की विचारधारा से प्रभावित था। उस पर युवाओं को हिंसक गतिविधियों के लिए उकसाने वाली सामग्री प्रसारित करने का भी आरोप है। जांच के दौरान उसके सोशल मीडिया अकाउंट की भी पड़ताल की गई। एटीएस के अनुसार, फेसबुक पर वह चेहरा ढककर जिहाद और खिलाफत से संबंधित पोस्ट साझा करता था। उसके मोबाइल फोन में पाकिस्तान से जुड़े कथित जिहादी व्हाट्सएप ग्रुप भी मिले हैं, जिनमें चंदे और धन जुटाने से संबंधित बातचीत होने की जानकारी सामने आई है।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए फंडिंग की जांच
एटीएस के मुताबिक, पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में रहते हुए जफर ने क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से रकम भेजने की कोशिश की। जांच में बाइनेंस अकाउंट से संबंधित जानकारी मांगे जाने और यूएसडीटी के जरिए कथित तौर पर कई बार रकम भेजे जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी अब उसके बैंकिंग और क्रिप्टो लेनदेन के साथ-साथ पाकिस्तान स्थित संपर्कों और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
मदरसे के नाम पर चंदा जुटाने का आरोप
एटीएस का आरोप है कि जफर मदरसे के नाम पर लोगों से चंदा जुटाता था और इसी रकम को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क तक पहुंचाने की कोशिश करता था। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े थे और धन का इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया जाना था।
