Bareilly News : नैनो नहीं, पारंपरिक खाद पर किसानों का भरोसा, रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शोध में सामने आई वजह

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Edited By Anjali Singh
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करीब 400 किसानों पर हुआ अध्ययन, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को अभी यूरिया-डीएपी का विकल्प नहीं मान रहे किसान

रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शोध में सामने आया कि किसान अब भी नैनो फर्टिलाइजर के मुकाबले पारंपरिक उर्वरकों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। करीब 400 किसानों पर हुए अध्ययन में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की स्वीकार्यता सीमित मिली।

बरेली, अमृत विचार। नैनो फर्टिलाइजर को पर्यावरण के अनुकूल और पारंपरिक उर्वरकों के मुकाबले बेहतर विकल्प के तौर पर बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन किसानों के बीच इसकी स्वीकार्यता अभी सीमित है। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में हुए एक शोध में सामने आया है कि किसान अब भी पारंपरिक उर्वरकों को ही पहली पसंद मान रहे हैं।

विश्वविद्यालय के बिजनेस एंड एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के शोधार्थी डॉ. पुष्पेंद्र मौर्य ने किसानों के बीच नैनो फर्टिलाइजर की स्वीकार्यता और उनके दृष्टिकोण को लेकर शोध किया। यह शोध विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर सौरभ वर्मा के निर्देशन में पूरा हुआ।

करीब 400 किसानों से ली गई राय

शोध के दौरान करीब 400 किसानों से बातचीत की गई। इसमें किसानों की नैनो फर्टिलाइजर को लेकर जागरूकता, धारणा और इस्तेमाल के अनुभव को समझने का प्रयास किया गया। अध्ययन में पाया गया कि बहुत कम किसान नैनो फर्टिलाइजर के इस्तेमाल को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं। शोध के मुताबिक, बड़ी संख्या में किसान अभी नैनो फर्टिलाइजर के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखते। कई किसानों को यह भी लगता है कि नैनो फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से उनकी फसल की उपज प्रभावित हुई है।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को विकल्प नहीं मानते

शोध में सामने आया कि किसान नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को पारंपरिक यूरिया और डीएपी का पूर्ण विकल्प नहीं मान रहे हैं। फसल पर प्रभाव, उत्पाद की उपयोगिता और अपने व्यावहारिक अनुभव के आधार पर किसान पारंपरिक उर्वरकों पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। शोधार्थी के अनुसार, किसानों के बीच नैनो फर्टिलाइजर को लेकर धारणा केवल कंपनियों के प्रचार से नहीं बदल रही है। किसान किसी उत्पाद को अपनाने से पहले उसके वास्तविक परिणाम और उपयोगिता को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।

सिर्फ प्रचार नहीं, किसानों को प्रशिक्षण भी जरूरी

शोध में यह भी सामने आया कि ग्रीन मार्केटिंग पहल किसानों में पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के प्रति रुचि पैदा कर सकती है, लेकिन केवल प्रचार-प्रसार से नैनो फर्टिलाइजर की स्वीकार्यता बढ़ाना मुश्किल है। शोध में सुझाव दिया गया है कि किसानों को नैनो फर्टिलाइजर के इस्तेमाल, मात्रा, फसल पर प्रभाव और इसके फायदे की व्यावहारिक जानकारी और प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। इससे किसानों का भ्रम दूर करने और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों को अपनाने में मदद मिल सकती है।

व्यावहारिक अनुभव से बन रही किसानों की धारणा

अध्ययन के अनुसार किसानों की उत्पाद को लेकर धारणा मुख्य रूप से उनके व्यावहारिक अनुभव, उपयोगिता और विश्वसनीय जानकारी से प्रभावित होती है। ऐसे में नैनो फर्टिलाइजर को किसानों तक पहुंचाने के लिए खेत स्तर पर प्रदर्शन, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराना अहम होगा।

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