Lakhimpur News : सीमा पर सुरक्षा के साथ किसानों की तरक्की में जुटे SSB जवान, 20 किसानों को दिए मशरूम बीज

Amrit Vichar Network
Edited By Anjali Singh
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70वीं वाहिनी एसएसबी की पहल, तीन दिवसीय प्रशिक्षण में वैज्ञानिक तरीके से मशरूम उत्पादन के सिखाए गुर

लखीमपुर खीरी के सीमावर्ती गांव बर्दिया में 70वीं वाहिनी SSB ने किसानों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया। तीन दिवसीय कार्यक्रम में 20 किसानों को वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी के साथ निशुल्क मशरूम बीज भी वितरित किए गए।

लखीमपुर खीरी। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा के साथ सीमावर्ती ग्रामीणों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए 70वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की ओर से पहल की गई है। सीमावर्ती गांव बर्दिया में तीन दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया। इसमें चयनित 20 प्रगतिशील किसानों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी देने के साथ उच्च गुणवत्ता वाले मशरूम बीज (स्पॉन) का निशुल्क वितरण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कार्यवाहक कमांडेंट राजू यादव के मार्गदर्शन में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कृषि विज्ञान केंद्र, मंझरा के सहयोग से किया जा रहा है।

कम लागत और कम जगह में मशरूम उत्पादन की जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. आरके सिंह और डॉ. विवेक कुमार पांडेय किसानों को मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक समझा रहे हैं। विशेषज्ञों ने बताया कि सीमित स्थान और कम लागत में भी मशरूम की खेती कर किसान अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं। किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी प्रक्रिया को व्यावहारिक तरीके से समझाया जा रहा है।

कंपोस्ट से लेकर बाजार प्रबंधन तक प्रशिक्षण

तीन दिवसीय प्रशिक्षण में किसानों को कंपोस्ट तैयार करने, स्पॉनिंग, फसल की देखभाल, कीट एवं रोग नियंत्रण और मशरूम की तुड़ाई के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसके अलावा मशरूम की गुणवत्ता बनाए रखने, भंडारण, बाजार प्रबंधन और उत्पाद की बिक्री से जुड़े पहलुओं पर भी विशेषज्ञ जानकारी दे रहे हैं। प्रशिक्षण के साथ किसानों को उत्पादन शुरू करने के लिए मशरूम स्पॉन भी उपलब्ध कराया गया है।

सीमावर्ती ग्रामीणों की आय बढ़ाने पर जोर

एसएसबी की इस पहल का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है। मशरूम उत्पादन कम जगह और अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू किया जा सकता है, इसलिए इसे किसानों की अतिरिक्त आय का माध्यम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम में सहायक कमांडेंट रौनक कुमार सिंह, एसएसबी के अन्य अधिकारी और जवान, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक तथा स्थानीय गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

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