25 करोड़ का CCTV टेंडर खुलने से एक दिन पहले रद्द, तीन नई जेलों में कैमरे लगाने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
बरेली, अमेठी और महोबा की नवनिर्मित जेलों में CCTV लगाने के लिए GeM पोर्टल पर निकाला गया था टेंडर; कारागार प्रशासन ने तकनीकी टीम की क्षमता का हवाला देकर निविदा निरस्त की, संस्था के जरिए काम कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
लखनऊ, अमृत विचारः बरेली, अमेठी और महोबा में नवनिर्मित जेल में सीसीटीवी कैमरे लगाने का जेम निविदा खुलने के एक दिन पहले ही निरस्त कर दिया गया। एआईजी प्रशासन ने शासन को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि यह कार्य संस्था के माध्यम से कराया जाए। सूत्रों से पता चला है कि यह टेंडर इसलिए निरस्त किया गया कि बड़ी मछलियां खेल नहीं कर पा रही थी। कारागार प्रशासन ने भी अपने सिर से बोझ हटाने के लिए अचानक टेंडर निरस्त करने का निर्णय लिया।
बता दें कि उक्त तीनों जेलों में सीसीटीवी लगवाने के लिए जेम पोर्टल पर टेंडर जारी किया गया था। निविदा कराने के लिए डीआईजी प्रदीप गुप्ता को नोडल अधिकारी बनाया गया था। निविदा खुलने एक दिन पहले ही अचानक निरस्त कर दिया गया। निरस्तीकरण के बाद जिन फर्मों ने निविदा में भाग लिया था तथा जिन फर्मों को यह प्रतीत हो रहा था कि उनकी फर्म निविदा में चयनित हो जाएंगे, ने आरोप लगाया कि पसंदीदा फर्म को काम नहीं मिलने की संभावनाओं को देखते हुए कारागार प्रशासन ने निविदा निरस्त कर दिया।
फर्म संचालकों ने कहा कि एक बड़ी मछली को खुश करने के लिए एसा किया गया है, क्योंकि पसंदीदा फर्म को काम न मिलने की संभवना थी। उधर, इस प्रकरण पर नोडल एवं डीआईजी कारागार प्रदीप गुप्ता ने अमृत विचार संवाददाता से बताया कि इस निविदा में कारागार की टेक्निकल टीम बहुत ही योग्य नहीं थी। तमाम आपत्तियां आ सकती थी, जिसे देखते हुए निरस्त कर दिया गया। हालांकि उनका यह जवाब बहुत हजम नहीं हुआ क्योंकि पूर्व में भी इन्हीं टेक्निकल टीम के माध्यम से कई कार्य स्वयं कारागार विभाग ने कराए हैं। सूत्रों के मुताबिक नोडल डीआईजी प्रदीप गुप्ता थे, लेकिन निरस्तीकरण का पत्र एआईजी धर्मेंद्र सिंह ने लिखा है। यह अपनेआप में विरोधाभासी प्रतीत हो रहा है।
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