21 साल बाद खुला कलेक्शन एजेंट हत्याकांड का राज! कोर्ट में शुरू हुई गवाही, अब 20 अगस्त को होगी जिरह
2005 में कादीपुर में गोली मारकर हत्या और 90 हजार रुपये लूटने का आरोप, मृतक के भाई कमलेश चंद्र मोदनवाल ने कोर्ट में दर्ज कराई गवाही
सुलतानपुर। करीब 21 साल से कानूनी प्रक्रिया में उलझे कलेक्शन एजेंट दिनेश चंद्र मोदनवाल हत्याकांड में आखिरकार गवाही की शुरुआत हो गई है। मंगलवार को मामले में मृतक के भाई कमलेश चंद्र मोदनवाल ने अदालत में गवाही दर्ज कराई। बचाव पक्ष की ओर से उनसे जिरह भी की गई, लेकिन यह पूरी नहीं हो सकी। अब शेष जिरह के लिए अदालत ने गवाह को 20 अगस्त को तलब किया है।
14 अप्रैल 2005 को हुई थी हत्या
जौनपुर जिले के शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के बीबीगंज (अरगूपुर कला) गांव निवासी दिनेश चंद्र मोदनवाल हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड में कलेक्शन एजेंट थे। 14 अप्रैल 2005 को वह कंपनी का सामान सप्लाई करने और तगादा वसूलने के लिए सुलतानपुर के कादीपुर बाजार पहुंचे थे।
आरोप है कि इसी दौरान बाइक सवार बदमाशों ने असलहे के बल पर उन्हें गोली मार दी और उनके पास मौजूद 90 हजार रुपये लूट लिए। घटना के बाद दिनेश चंद्र की हत्या कर दी गई।
भाई की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा
घटना के बाद मृतक के भाई कमलेश चंद्र मोदनवाल ने कादीपुर थाने में अज्ञात लुटेरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस की विवेचना आगे बढ़ने पर मामले में प्रमोद श्रीवास्तव, शिवनाथ, नरेंद्र गिरि और हरीश मौर्य को आरोपी बनाया गया।
हालांकि, मामला करीब 21 वर्षों तक विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं में उलझा रहा और गवाही शुरू नहीं हो सकी।
21 साल बाद कोर्ट में दर्ज हुई पहली अहम गवाही
लंबे इंतजार के बाद मंगलवार को मृतक के भाई कमलेश चंद्र मोदनवाल की गवाही दर्ज हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय ने उनसे जिरह की, लेकिन पूरी जिरह नहीं हो सकी।
स्पेशल जज गैंगेस्टर एक्ट राकेश ने शेष जिरह के लिए गवाह को 20 अगस्त को अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
अब आगे बढ़ेगी न्यायिक प्रक्रिया
वादी मुकदमा की गवाही शुरू होने के साथ ही करीब दो दशक से अधिक पुराने इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ी है। अब अदालत में होने वाली शेष जिरह और आगे की कार्यवाही पर मामले की दिशा निर्भर करेगी।
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