India Sugar Import: 10 साल में पहली बार विदेश से चीनी खरीदेगा भारत, जानिए क्या है वजह
अमृत विचार : भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी का प्रड्यूसर है लेकिन नौबत आज ये आ गई है की विदेशों से चीनी इम्पोर्ट करने की जरूरत हो गई है केंद्र सरकार ने इसके लिए 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है देश में शुगर की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र ने ये बड़ा फैसला लिया है। भारत ने आखिरी बार बड़ी मात्रा में चीनी का आयात 2017-18 में किया था।
सरकार ने घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने और त्योहारों से पहले कीमतों पर दबाव कम करने के 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत किया जा सकेगा। बता दें, घरेलू मार्केट में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। पिछले 2 महीनों में कीमतों में करीब 40% तक की बढ़ोतरी हुई है।
भारत में किन देशों से आएगी चीनी?
विश्व बैंक के WITS के मुताबिक, भारत ने 2024 में कच्ची कन्ने की करीब 31.89 लाख टन खेप आयत की। इसमें ब्राजील की हिस्सेदारी 99.85 हिस्सेदारी रही जिसमे करीब 31.85 लाख टन चीनी आयात की है जबकि फ्रांस से करीब 31.48 चीनी, जर्मनी से 11. 28 लाख किलो, पोलैंड से 4.78 लाख किलो और अमेरिका से 90.720 लाख किलो चीनी आयत की गई। भारत के आयात में ब्राजील मुख्या भूमिका में है, हलाकि वहा से चीनी आने में करीब 2 महीने लग सकते है जिससे इसका बाजार पर असर तुरंत नहीं दिखेगा। इसका बड़ा असर ओक्टुबर के आस पास दिखाई दे सकता है। जब आयातित चीनी घरेलु बाजार में पहुंचनी शुरु होगी।
चीनी की कीमतों में बढ़ी कीमत की बड़ी वजह
चीनी की बढ़ी कीमतों की एक बड़ी वजह मौसम में आये बड़े बदलाव को माना जा रहा है गन्ने की फसल पर इसका काफी असर देखने को मिला है। गन्ना पानी की अधिक खपत वाली फसल है और इस साल मानसून की देरी और कई जगहों पर समय से बारिश न होने से भी इसकी फसल पर गहरा असर पड़ा है। जून के अंत में बारिश की कमी 40 फीसदी से ज्यादा थी। वही अब इसी बीच त्योहारों का समय आने से भी इससे दबाव बढ़ा है, कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से ये पता चलता है कि 14 अगस्त तक देश में गन्ने का रकबा करीब 58.3 लाख हेक्टेयर था, जो पिछले साल की समान अवधि से थोड़ा कम है।
कैसे होती है गन्ने की खेती
गन्ने की खेती खासकर यूपी के कई जिलों में होती है और इसके लिए मानसून काफी हद तक जिम्मेदार होता है। बरसात का मौसम में फसल को पर्याप्त नमी मिलती है। जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है लेकिन अगर खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहे, तो यही बारिश किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। जलभराव से गन्ने की जड़ें कमजोर होने लगती हैं, पौधों का विकास रुक जाता है और कई तरह के रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए बरसात में भी किसानों को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी होती है।
यूपी में होती है गन्ने की पैदावार
यूपी को भारत का 'शुगर का कटोरा' कहा जाता है. खासकर पश्चिमी यूपी में गन्ने की जबरदस्त खेती होती है. बंपर गन्ना पैदावार में यूपी के TOP 10 जिलों में मेरठ परिक्षेत्र के 6 जिले शामिल हैं. जहां किसानों ने गन्ने का सर्वाधिक उत्पादन किया है।
यूपी का 'गन्ना बेल्ट'
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के टॉप 10 गन्ना उत्पादक जिलों में मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत और अलीगढ़ शामिल हैं. इतना ही नहीं टॉप टेन जिलों में लखीमपुर खीरी के अलावा प्रति हेक्टेयर सर्वाधिक उत्पादन में सभी जिले पश्चिमी यूपी के ही हैं।
त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी मांग
बता दें कि पिछले मार्च महीने से ही चीनी के दाम लगातार बढ़ रहे थे, लेकिन बीते 15 दिनों के भीतर ही चीनी के Retail Prices में अचानक प्रति किलो 17 रुपये तक का बड़ा इजाफा आया है। चीनी महगीं होने का असर आम आदमी की रसोई से लेकर चाय, दूध, मिठाइयों, जूस और चॉकलेट उद्योग जगत में देखने को मिल रहा है। रक्षाबंधन से पहले ही मिठाई की कीमतों में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा जबकि चीनी से बनने वाले दूसरे उत्पादों में भी इसका अलग असर देखने को मिलेगा।
