Bahraich Murder Case : 27 साल बाद मिला इंसाफ, फरसे से हत्या करने वाले दोषी को उम्रकैद; कोर्ट ने लगाया 1.02 लाख का जुर्माना
1998 में घर के बरामदे में लेटे महानंद मिश्र की गर्दन पर किया था फरसे से वार
बहराइच में 1998 के हत्या मामले में अदालत ने 27 साल बाद फैसला सुनाते हुए दोषी अंगद शुक्ल उर्फ करुणेश को उम्रकैद की सजा दी है। आरोपी ने पुरानी रंजिश में महानंद मिश्र की फरसे से हत्या की थी। कोर्ट ने दोनों धाराओं में कुल 1.02 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
बहराइच। करीब 27 साल पुराने हत्या के मामले में बहराइच की अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश गैंगेस्टर एक्ट सुनील प्रसाद की अदालत ने अभियुक्त अंगद शुक्ल उर्फ करुणेश को हत्या के मामले में दोषसिद्ध करते हुए उम्रकैद और एक लाख रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं धमकी देने के मामले में एक वर्ष के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
1998 में फरसे से कर दी थी हत्या
मामला थाना हरदी क्षेत्र के सिकन्दरपुर गांव का है। अभियोजन के मुताबिक 19 सितंबर 1998 को दोपहर करीब 2:30 बजे महानंद मिश्र अपने घर के बरामदे में तख्त पर लेटे थे। इसी दौरान पुरानी पारिवारिक रंजिश के चलते अंगद शुक्ल हाथ में फरसा लेकर वहां पहुंचा और महानंद की गर्दन पर वार कर दिया। गंभीर चोट लगने से उनकी मौत हो गई।
घटना के समय मृतक का भतीजा मौके के पास मौजूद था। उसके शोर मचाने पर परिजन और अन्य लोग वहां पहुंचे। अभियोजन के अनुसार मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को घटना करते देखा था। आरोप है कि घटनास्थल पर पहुंचे लोगों को भी आरोपी ने जान से मारने की धमकी दी थी।
भाई की तहरीर पर दर्ज हुआ था मुकदमा
घटना के बाद मृतक के भाई राजितराम की तहरीर पर थाना हरदी में मु0अ0सं0 165/1998 के तहत धारा 302, 506 और 120बी भादवि में मुकदमा दर्ज किया गया था। तत्कालीन विवेचक एवं थानाध्यक्ष बीआर बौद्ध ने साक्ष्य संकलन और गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद अभियुक्त अंगद शुक्ल के खिलाफ धारा 302 और 506 में आरोप पत्र 13 अक्टूबर 1998 को न्यायालय में दाखिल किया। न्यायालय ने 17 सितंबर 1999 को अभियुक्त के विरुद्ध आरोप तय किए थे। इसके बाद मामले की सुनवाई और अभियोजन की पैरवी लंबे समय तक चली।
हत्या में उम्रकैद, धमकी में एक साल की सजा
अभियोजन और पुलिस की प्रभावी पैरवी के बाद 22 अगस्त 2026 को अदालत ने अंगद शुक्ल को दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
वहीं धारा 506 के तहत एक वर्ष के सश्रम कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड न देने पर 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों धाराओं में कुल 1.02 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।
पुलिस की प्रभावी पैरवी से दोषसिद्धि
पुलिस के अनुसार मामले में थाना प्रभारी हरदी, मॉनीटरिंग सेल पुलिस कार्यालय बहराइच, अभियोजक प्रमोद सिंह, कोर्ट मोहर्रिर मनोज कुमार और थाना पैरोकार कांस्टेबल रतन वर्मा की प्रभावी पैरवी रही।
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